रणबीर कपूर की पहली हिट: 'वेक अप सिड' से मिली पहचान

रणबीर कपूर को बॉलीवुड में पहली बड़ी सफलता के लिए दो साल का इंतजार करना पड़ा। 2007 में 'सावरिया' से डेब्यू के बाद, 2009 में आई 'वेक अप सिड' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने उन्हें एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित किया।

हिंदी सिनेमा में पिछले 18 वर्षों से अपनी अदाकारी का लोहा मनवा रहे रणबीर कपूर आज फिल्म जगत के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। हालांकि, कपूर खानदान की विरासत से ताल्लुक रखने के बावजूद रणबीर के लिए शुरुआती सफर आसान नहीं था। उन्हें अपनी पहली व्यावसायिक सफलता और एक अभिनेता के रूप में पहचान हासिल करने के लिए लगभग दो साल तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। साल 2007 में बड़े ताम-झाम के साथ शुरू हुआ उनका करियर शुरुआती दो फिल्मों में वह गति नहीं पकड़ सका जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

शुरुआती फिल्में और बॉक्स ऑफिस का संघर्ष

रणबीर कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2007 में दिग्गज निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘सावरिया’ से की थी। इस फिल्म में उनके साथ सोनम कपूर ने भी डेब्यू किया था। भारी बजट और बड़े स्तर पर प्रचार के बावजूद, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने में विफल रही। इसके बाद साल 2008 में उनकी दूसरी फिल्म ‘बचना ए हसीनों’ रिलीज हुई। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म ने औसत प्रदर्शन किया, लेकिन यह रणबीर को वह स्टारडम नहीं दिला सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। विश्लेषकों के अनुसार, इन दो फिल्मों के बाद रणबीर के करियर पर सवाल उठने लगे थे।

'वेक अप सिड': करियर का निर्णायक मोड़

रणबीर कपूर के करियर में असली बदलाव 2 अक्टूबर 2009 को आया, जब अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘वेक अप सिड’ रिलीज हुई। इस फिल्म में रणबीर ने सिद्धार्थ मेहरा नामक एक लापरवाह युवक का किरदार निभाया था, जो धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारियों को समझता है। फिल्म में उनके साथ कोंकणा सेन शर्मा मुख्य भूमिका में थीं। इस फिल्म को समीक्षकों द्वारा काफी सराहा गया और यह रणबीर की पहली 'सेमी-हिट' फिल्म साबित हुई। इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया, बल्कि रणबीर को एक वर्सटाइल एक्टर के रूप में भी पहचान दिलाई।

बॉक्स ऑफिस आंकड़े और वित्तीय प्रदर्शन

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, ‘वेक अप सिड’ का निर्माण लगभग ₹18 करोड़ के बजट में किया गया था। 74 करोड़ का शुद्ध संग्रह किया, जबकि इसका वैश्विक कारोबार ₹47 करोड़ के करीब रहा। फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि रणबीर कपूर शहरी और युवा दर्शकों के बीच अपनी पकड़ बना चुके हैं। इस फिल्म की सफलता के बाद ही उन्हें ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ और ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर’ जैसे प्रोजेक्ट्स मिले, जिन्होंने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स और 'रामायण'

वर्तमान में रणबीर कपूर भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे अभिनेताओं में शामिल हैं। उनके आगामी प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर चर्चा में हैं, जिसका बजट लगभग ₹4000 करोड़ बताया जा रहा है। इस फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, उनके पास संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ और संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल पार्क’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। विश्लेषकों का मानना है कि रणबीर की अभिनय क्षमता ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है जहाँ वह हर बड़े निर्देशक की पहली पसंद बने हुए हैं।

निष्कर्ष

रणबीर कपूर की 18 साल की यात्रा यह दर्शाती है कि निरंतरता और सही पटकथा का चुनाव किसी भी कलाकार के लिए कितना महत्वपूर्ण है। 'वेक अप सिड' ने उनके करियर की जो नींव रखी थी, उसी पर आज उनकी सफलता की बुलंद इमारत खड़ी है। शुरुआती असफलताओं के बाद भी उन्होंने अपनी कला पर ध्यान केंद्रित किया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

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