अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: भारतीय कपड़ा निर्यात और बाजार पर प्रभाव

अमेरिका और बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते के तहत बांग्लादेशी कपड़ों को शून्य टैरिफ सुविधा मिलने की घोषणा हुई है। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय कपड़ा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। विश्लेषक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करेगा।

अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय व्यापार समझौते ने वैश्विक कपड़ा बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है और इस समझौते के तहत बांग्लादेशी परिधान और कपड़ा उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य टैरिफ (Zero Tariff) का लाभ मिलने की संभावना है। इस घोषणा के बाद 10 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार में कपड़ा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 25% से अधिक टूट गए। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट उस अनिश्चितता का परिणाम है जो बांग्लादेश को मिलने वाली संभावित टैरिफ छूट के कारण उत्पन्न हुई है।

भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही एक व्यापार ढांचा मौजूद है, जिसके तहत भारतीय कपड़ा उत्पादों पर 18% का पारस्परिक टैरिफ लागू है। दूसरी ओर, बांग्लादेश के साथ हुए नए समझौते में सामान्य टैरिफ को घटाकर 19% किया गया है, लेकिन इसमें एक विशेष कोटा प्रणाली शामिल है। यह प्रणाली बांग्लादेशी निर्यातकों को कुछ शर्तों के साथ शून्य टैरिफ पर अमेरिका में माल भेजने की अनुमति देती है। 5 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है।

अमेरिका-बांग्लादेश शून्य टैरिफ समझौते के प्रमुख प्रावधान

नौ महीने की गहन वार्ता के बाद हस्ताक्षरित इस समझौते में कार्यकारी आदेश 14257 का संदर्भ दिया गया है। इसके तहत बांग्लादेशी वस्तुओं पर टैरिफ को प्रारंभिक स्तरों से घटाकर 19% कर दिया गया है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण पहलू कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए विशिष्ट प्रतिबद्धता है। वाशिंगटन एक ऐसी प्रणाली स्थापित करने पर सहमत हुआ है जिसके माध्यम से बांग्लादेशी निर्यात को एक निश्चित मात्रा तक शून्य टैरिफ पर प्रवेश मिलेगा और यह कोटा इस आधार पर तय किया जाएगा कि बांग्लादेश अमेरिका से कितने कपड़ा इनपुट, जैसे कि अमेरिकी कपास और मानव निर्मित फाइबर का आयात करता है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह 'इनपुट-लिंक्ड' कोटा प्रणाली बांग्लादेश के लिए दोहरी चुनौती और अवसर दोनों है। यदि बांग्लादेश अमेरिकी कच्चे माल का उपयोग करता है, तो उसे शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा, जिससे उसकी उत्पादन लागत कम हो सकती है। हालांकि, इससे बांग्लादेशी निर्यातकों की आपूर्ति श्रृंखला पर अमेरिकी निर्भरता बढ़ेगी। भारतीय निर्यातकों के लिए चिंता का विषय यह है कि उच्च टैरिफ के बावजूद, इस कोटे के माध्यम से बांग्लादेश अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है, जो वर्तमान में 118 बिलियन डॉलर का वैश्विक आयात बाजार है।

भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिक्रिया और बाजार का रुझान

इस समझौते से पहले भारतीय कपड़ा उद्योग में काफी उत्साह देखा जा रहा था। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कपड़ा निर्यात गंतव्य है। कुल निर्यात में लगभग 70% हिस्सा तैयार परिधानों का है। कपड़ा मंत्रालय ने पहले संकेत दिया था कि 18% का टैरिफ भारत को चीन (30%), वियतनाम (20%) और पाकिस्तान (19%) जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखेगा। एम. सुब्रमणियन के अनुसार, अगले तीन वर्षों में अमेरिका को होने वाला निर्यात दोगुना होकर ₹30,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था।

बाजार के जानकारों का कहना है कि शून्य टैरिफ की घोषणा ने इस उत्साह को कुछ हद तक प्रभावित किया है। तिरुप्पुर जैसे प्रमुख केंद्रों में निर्यातकों को उम्मीद थी कि बांग्लादेश से ऑर्डर भारत की ओर स्थानांतरित होंगे, लेकिन नई डील ने इस समीकरण को जटिल बना दिया है। हालांकि, अभी भी कई विवरण स्पष्ट नहीं हैं, जैसे कि किन श्रेणियों को शून्य टैरिफ मिलेगा और इसकी समय सीमा क्या होगी। जब तक ये विवरण स्पष्ट नहीं होते, तब तक भारतीय उद्योग की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार समझौता और रणनीतिक लाभ

अमेरिकी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के मोर्चे पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। 27 जनवरी को घोषित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के तहत, भारतीय कपड़ा उत्पादों को 263 बिलियन डॉलर के यूरोपीय बाजार में तत्काल शून्य-टैरिफ प्रवेश प्राप्त हुआ है। केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से यूरोपीय संघ के परिधान बाजार में भारत की हिस्सेदारी 5% से बढ़कर 9% होने की संभावना है। 5 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता बांग्लादेश के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है और अब तक बांग्लादेश को एक अल्प विकसित देश (LDC) के रूप में यूरोपीय बाजार में तरजीही पहुंच प्राप्त थी। अब भारत को भी समान लाभ मिलने से बांग्लादेश का टैरिफ संबंधी लाभ समाप्त हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब बांग्लादेश को भारत के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी। भारत का कपड़ा उद्योग अधिक एकीकृत और विविध है, और इसे सरकार द्वारा घोषित विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का समर्थन प्राप्त है, जो इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाता है।

प्रतिस्पर्धात्मक विश्लेषण और भविष्य की स्थिति

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक कपड़ा व्यापार में अब एक नया संतुलन बन रहा है। जहां एक ओर अमेरिका में बांग्लादेश को कुछ रियायतें मिली हैं, वहीं दूसरी ओर यूरोप में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की है। भारतीय कपड़ा क्षेत्र की मजबूती उसके कच्चे माल की उपलब्धता और कुशल श्रम शक्ति में निहित है। केंद्रीय बजट में घोषित प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे में निवेश भारतीय निर्माताओं को लागत कम करने में मदद कर सकते हैं।

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