भारत की ट्रेड डील से घबराया बांग्लादेश, चुनाव से पहले US के कदमों में जा गिरा

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार 12 फरवरी के राष्ट्रीय चुनावों से ठीक 72 घंटे पहले 9 फरवरी को अमेरिका के साथ एक गोपनीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली है। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार सौदे के बाद अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

ढाका और वाशिंगटन के बीच 9 फरवरी को एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता बांग्लादेश में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से मात्र तीन दिन पहले किया जा रहा है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा इस सौदे को अंतिम रूप दिया गया है, जिसे लेकर देश के भीतर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका को होने वाले बांग्लादेशी निर्यात, विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) की सुरक्षा करना है।

भारत के साथ प्रतिस्पर्धा और टैरिफ का दबाव

विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश इस समझौते को जल्दबाजी में पूरा करने का प्रयास कर रहा है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते ने क्षेत्रीय समीकरण बदल दिए हैं और उस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया था। बांग्लादेश को डर है कि यदि वह समान या बेहतर शर्तें प्राप्त नहीं करता है, तो वह अमेरिकी बाजार में अपना हिस्सा भारत के हाथों खो सकता है और वर्तमान में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिका को होने वाले रेडीमेड गारमेंट निर्यात पर निर्भर है, जो उसके कुल अमेरिकी निर्यात का लगभग 90% हिस्सा है।

टैरिफ संरचना में क्रमिक बदलाव

व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में वाशिंगटन ने ढाका पर 37% का भारी टैरिफ लगाया था। इसके बाद निरंतर वार्ताओं के माध्यम से जुलाई में इसे 35% और अगस्त में 20% तक लाया गया। आगामी 9 फरवरी के समझौते के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि टैरिफ और घटकर 15% के स्तर पर आ जाएगा। यह कटौती बांग्लादेशी निर्यातकों के लिए राहत की बात हो सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी शर्तें चिंता का विषय बनी हुई हैं।

गोपनीयता और नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट

इस व्यापार सौदे की सबसे अधिक आलोचना इसकी गोपनीयता को लेकर हो रही है। 2025 के मध्य में अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक औपचारिक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत सभी टैरिफ और व्यापार वार्ताओं को गुप्त रखने का प्रावधान है। समझौते का मसौदा न तो संसद में पेश किया गया और न ही उद्योग जगत के प्रमुख हितधारकों के साथ साझा किया गया है। वाणिज्य सलाहकार एसके बशीर उद्दीन ने पहले कहा था कि समझौते में देश के हितों के खिलाफ कुछ भी नहीं होगा, लेकिन विवरण अभी भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

समझौते में अमेरिका की प्रमुख शर्तें

रिपोर्टों के अनुसार, इस सौदे में अमेरिका ने कई कड़ी शर्तें रखी हैं। पहली शर्त चीन से आयात कम करने और उसके स्थान पर अमेरिका से सैन्य उपकरणों का आयात बढ़ाने की है। दूसरी शर्त के तहत, अमेरिकी उत्पादों को बांग्लादेशी बाजार में बिना किसी बाधा के प्रवेश मिलना चाहिए। इसके अतिरिक्त, बांग्लादेश को अमेरिकी मानकों और प्रमाणन को बिना किसी जांच के स्वीकार करना होगा। विशेष रूप से वाहनों और उनके पुर्जों के आयात के संबंध में किसी भी निरीक्षण की अनुमति नहीं होगी, जिससे अमेरिकी ऑटोमोबाइल क्षेत्र को बांग्लादेश में सीधी पहुंच मिल सके।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और राजनीतिक प्रभाव

सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के फेलो देवप्रिया भट्टाचार्य ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, चुनाव से ठीक पहले इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करना आने वाली निर्वाचित सरकार के हाथ बांधने जैसा है। चूंकि यह एक गैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार द्वारा किया जा रहा है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी और कार्यान्वयन का बोझ नई सरकार पर पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता चुनाव के बाद होता, तो इस पर व्यापक राजनीतिक चर्चा संभव थी, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।

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