भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फरवरी 2026 की अपनी तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। 25% पर स्थिर रखा है। यह निर्णय वर्ष 2025 के दौरान ब्याज दरों में की गई कुल 125 बेसिस पॉइंट की आक्रामक कटौती के बाद आया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि हालांकि आर्थिक विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन महंगाई के भविष्य के परिदृश्य को देखते हुए सतर्क रुख अपनाना आवश्यक है।
ब्याज दरों में स्थिरता और पिछला घटनाक्रम
25% पर बनाए रखने का निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है, हालांकि कर्जदारों को ईएमआई में राहत की उम्मीद थी। इससे पहले, कैलेंडर वर्ष 2025 में आरबीआई ने चार चरणों में दरों में कटौती की थी। 25% की और कटौती की गई। इस निरंतर कटौती के बाद अब केंद्रीय बैंक ने 'रुको और देखो' की नीति अपनाई है।
महंगाई के अनुमानों में संशोधन
मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए महंगाई के अपने अनुमानों में बदलाव किया है। 2% रहने का अनुमान है। यह पिछले अनुमानों की तुलना में थोड़ा अधिक है। 1% रहने का अनुमान जताया गया है। गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को छोड़कर अन्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में दिख रही हैं।
आर्थिक विकास और तरलता प्रबंधन
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हाल के आर्थिक आंकड़ों और व्यापारिक सौदों से संकेत मिलता है कि भारत की विकास दर सकारात्मक बनी रहेगी और आरबीआई ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता (Liquidity) की स्थिति पर भी नजर बनाए रखने की बात कही है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है और इसमें बदलाव न होने का सीधा मतलब है कि बैंकों के लिए फंड की लागत स्थिर रहेगी, जिससे फिलहाल होम लोन या कार लोन की ब्याज दरों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भविष्य का संकेत
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई का यह कदम महंगाई को 4% के लक्ष्य के भीतर स्थायी रूप से रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि खाद्य कीमतों में अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण केंद्रीय बैंक ने दरों में और कटौती करने के बजाय स्थिरता को प्राथमिकता दी है और अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक अप्रैल 2026 में निर्धारित है, जहां पूरे वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का नया डेटा और विस्तृत अनुमान पेश किया जाएगा।
