सीएम के जवाब देते समय विधानसभा में हंगामा, CM ने स्वीकार की कांग्रेस की बहस की चुनौती

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष की '5 साल बनाम 2 साल' की बहस की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर पेपर लीक और कर्ज को लेकर तीखे प्रहार किए, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 11 फरवरी तक स्थगित कर दी गई।

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्षी दल कांग्रेस को सीधे तौर पर चुनौती दी। मुख्यमंत्री ने सदन में घोषणा की कि वह कांग्रेस द्वारा दी गई 'पांच साल बनाम दो साल' के कार्यकाल पर बहस की चुनौती को स्वीकार करते हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से इस विषय पर बहस के लिए समय निर्धारित करने का आग्रह किया और संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखे। मुख्यमंत्री के इस संबोधन के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके परिणामस्वरूप विधानसभा की कार्यवाही को 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

पांच साल बनाम दो साल की बहस पर मुख्यमंत्री का रुख

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी सरकार के दो साल के कार्यकाल और कांग्रेस की पिछली सरकार के पांच साल के कार्यकाल के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्होंने कहा कि विपक्ष ने जो चुनौती दी थी, उसे वह स्वीकार करते हैं और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज सदन में प्रस्तुत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से अनुरोध किया कि इस महत्वपूर्ण बहस के लिए एक निश्चित समय तय किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री के दावों का विरोध किया और सदन में शोर-शराबा शुरू कर दिया।

पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर तीखे प्रहार

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आते ही पेपर लीक करने वाले माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया है, जिससे प्रदेश के युवाओं में दोबारा आत्मविश्वास पैदा हुआ है। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग खुद को महात्मा गांधी का अनुयायी बताते हैं, उन्हें गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' दोबारा पढ़नी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान युवाओं के हक मारे गए और उन्हें निराशा के अंधकार में धकेला गया। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से कहा कि वह युवाओं को संदेश दें कि अब परीक्षाएं पूरी ईमानदारी से होंगी और बैकडोर एंट्री करने वालों की जगह जेल में होगी।

आर्थिक स्थिति और कर्ज के आंकड़ों पर स्पष्टीकरण

79 lakh crore से अधिक का कर्ज मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार को पता था कि वे सत्ता में वापस नहीं आएंगे, इसलिए उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। जब नेता प्रतिपक्ष ने विकास कार्यों पर सवाल उठाए, तो मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्ष को विकास दिखाई नहीं दे रहा है, तो वह उनके लिए चश्मे की व्यवस्था कर सकते हैं। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वित्तीय प्रबंधन में सुधार हुआ है।

विपक्ष के आरोप और टीकाराम जूली का पलटवार

इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार केवल ब्रांडिंग और रील बनाने में व्यस्त है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है और उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अपनी ब्रांडिंग के लिए ₹8 crore का ठेका दे रखा है। जूली ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और एक मंत्री ने खुद विधायक दल की बैठक में सरकार की हकीकत बयां की है। इसके अतिरिक्त, जूली ने 'वंदे मातरम' के विवादित अंशों को लेकर भी सत्ता पक्ष को घेरा और आरएसएस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आक्रामक रुख यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार आगामी स्थानीय चुनावों और उपचुनावों से पहले अपनी छवि को मजबूत करना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि '5 साल बनाम 2 साल' की बहस की चुनौती स्वीकार करना एक रणनीतिक कदम है ताकि पिछली सरकार की विफलताओं को जनता के सामने दोबारा लाया जा सके। वहीं, विपक्ष द्वारा उठाए गए आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दे सरकार के लिए आने वाले समय में चुनौती बन सकते हैं। सदन की कार्यवाही 11 फरवरी तक स्थगित होने से अब सभी की नजरें आगामी सत्र और प्रस्तावित बहस पर टिकी हैं।

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