साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला: बयानों में विरोधाभास और गायब सीसीटीवी ने उलझाई गुत्थी

कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की जांच में पिता, कंपाउंडर और डॉक्टर के बयानों में भारी विरोधाभास सामने आया है। इंजेक्शन के समय और सीसीटीवी फुटेज गायब होने के आरोपों ने पुलिस की गुत्थी को और उलझा दिया है। फिलहाल एसआईटी मामले की गहनता से जांच कर रही है।

कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है। राजस्थान पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है, लेकिन मुख्य गवाहों और परिजनों के बयानों में सामने आए विरोधाभासों ने जांच की दिशा को उलझा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिसके कारण पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों और बयानों के मिलान पर निर्भर है।

साध्वी की मृत्यु के समय, उन्हें दिए गए इंजेक्शन और घटनास्थल से साक्ष्यों के कथित विलोपन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह केवल एक चिकित्सा संबंधी दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण छिपे हैं। वर्तमान में एसआईटी की अधिकारी छवि शर्मा के नेतृत्व में 10 से 11 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

बयानों में समय का बड़ा अंतर: पिता बनाम एफआईआर

जांच के दौरान सबसे बड़ा विरोधाभास साध्वी के पिता वीरम नाथ के बयानों में देखा गया है। मोर्चरी में दिए गए प्रारंभिक बयान में उन्होंने दावा किया था कि इंजेक्शन लगाए जाने के मात्र 5 मिनट के भीतर साध्वी की मृत्यु हो गई थी। हालांकि, पुलिस में दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) में यह समय 9 मिनट बताया गया है। मीडिया के सामने भी पिता ने 5 मिनट वाली बात ही दोहराई है। समय का यह 4 मिनट का अंतर चिकित्सा विज्ञान और कानूनी दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह इंजेक्शन के प्रभाव और प्रतिक्रिया की अवधि को निर्धारित करता है।

कंपाउंडर और डॉक्टर के दावों ने बढ़ाई उलझन

साध्वी को इंजेक्शन देने वाले कंपाउंडर देवी सिंह का बयान पिता के दावों से पूरी तरह अलग है। देवी सिंह के अनुसार, वह आश्रम से इंजेक्शन देकर निकल चुका था और करीब 20-25 मिनट बाद उसे फोन पर सूचना मिली कि साध्वी की तबीयत बिगड़ गई है। कंपाउंडर ने स्वीकार किया है कि उसने 'डेक्सोना' और 'डायनापार' नामक दो इंजेक्शन दिए थे। दूसरी ओर, प्रेक्षा अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार जैन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने पिछले छह महीनों से साध्वी का कोई चेकअप नहीं किया था और न ही कोई दवा लिखी थी। डॉक्टर के अनुसार, साध्वी को अस्पताल में 'कॉलेप्स' की स्थिति में लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

सीसीटीवी और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के आरोप

मामले में एक नया मोड़ स्थानीय निवासी रुद्र प्रताप सिंह राजपुरोहित के आरोपों से आया है। उन्होंने दावा किया है कि घटना के बाद आश्रम के आसपास से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं। हालांकि, पुलिस को मौके पर कैमरों के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि शुरुआत में परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया था। इन आरोपों ने जांच एजेंसियों को साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ के कोण पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

एसआईटी की जांच और वर्तमान स्थिति

एसआईटी प्रमुख छवि शर्मा के अनुसार, अब तक की जांच में कड़ी से कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने उस अस्पताल का भी दौरा किया है जहां साध्वी को अंतिम समय में ले जाया गया था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डेक्सोना और डायनापार सामान्य दवाएं हैं, लेकिन इनकी प्रतिक्रिया व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। पुलिस अब विसरा रिपोर्ट और फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।

विश्लेषकों के अनुसार, इस मामले में बयानों का विरोधाभास जांच को लंबा खींच सकता है। जब तक फॉरेंसिक साक्ष्य और मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय सामने नहीं आती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए घटनाक्रम के सही समय का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

निष्कर्षतः, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब एक जटिल कानूनी और चिकित्सा पहेली बन गया है। पुलिस की एसआईटी टीम हर संभावित कोण से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य गवाहों के बयान इस रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं।

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