साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत: वायरल वीडियो और 'न्याय' की आखिरी पुकार

जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मौत से पहले उनके वायरल वीडियो और ब्लैकमेलिंग के आरोपों ने सनसनी मचा दी थी।

राजस्थान के जोधपुर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना उस समय हुई जब साध्वी पहले से ही एक सोशल मीडिया विवाद और मानसिक दबाव से गुजर रही थीं और उनकी मौत के बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है। इस पोस्ट में लिखा था, 'जीते जी नहीं, जाने के बाद मिलेगा न्याय।

संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और अस्पताल का बयान

साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर के आरती नगर स्थित उनके आश्रम से बेहोशी की हालत में प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, जब उन्हें वहां लाया गया, तो उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी और वे 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाई गई) घोषित कर दी गईं। प्रेक्षा अस्पताल के डॉ और प्रवीण जैन ने बताया कि साध्वी के पिता महंत वीरमनाथ ने जानकारी दी थी कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से बुखार था। बुखार के इलाज के लिए आश्रम में ही एक नर्सिंग स्टाफ को बुलाकर इंजेक्शन लगवाया गया था, जिसके कुछ समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे निढाल हो गईं।

पोस्टमॉर्टम को लेकर विवाद और पिता का रुख

अस्पताल प्रशासन ने साध्वी के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए एमडीएम अस्पताल या महात्मा गांधी। अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। अस्पताल ने एंबुलेंस की सुविधा देने की भी पेशकश की, लेकिन साध्वी के पिता महंत वीरमनाथ ने सरकारी एंबुलेंस लेने से इनकार कर दिया। वे अपनी बेटी के शव को निजी वाहन से वापस आश्रम ले गए। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर मौत की असली वजह क्या थी और क्या इंजेक्शन के रिएक्शन या किसी अन्य कारण से उनकी जान गई।

कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा?

साध्वी प्रेम बाईसा पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर बाड़मेर और जोधपुर के इलाकों में एक बेहद लोकप्रिय कथावाचक और भजन गायिका थीं। वे बचपन से ही आध्यात्म की ओर आकर्षित थीं और उन्हें 'बाल साध्वी' के रूप में पहचान मिली थी। वे महंत वीरमनाथ की शिष्या और पुत्री थीं। उनके प्रवचनों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सुधार, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में लगा दिया था। उनकी सादगी और मधुर वाणी के कारण लोग उन्हें बहुत सम्मान देते थे।

वायरल वीडियो का विवाद और सच

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को उनके हालिया विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई 2025 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें साध्वी एक व्यक्ति के गले लगती नजर आ रही थीं और इस वीडियो को गलत तरीके से एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी छवि को भारी नुकसान पहुँचा। साध्वी ने खुद सामने आकर स्पष्ट किया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति उनके पिता महंत वीरमनाथ हैं। उन्होंने बताया था कि यह वीडियो करीब 3 साल पुराना है और एक बेटी का अपने। पिता के प्रति स्नेह था, जिसे साजिश के तहत अश्लील और आपत्तिजनक बनाकर पेश किया गया।

ब्लैकमेलिंग और 20 लाख की मांग

साध्वी ने मौत से कुछ समय पहले जोधपुर के बोरानाडा थाने में एक शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उन्हें बदनाम करने की धमकी दे रहे हैं और वीडियो वायरल न करने के बदले 20 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। जब साध्वी ने पैसे देने से मना कर दिया, तो आरोपियों ने वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया। इस घटना ने साध्वी को मानसिक रूप से तोड़ दिया था और उन्होंने देश के बड़े संतों और जगतगुरु शंकराचार्य को पत्र लिखकर अपनी पवित्रता साबित करने के लिए 'अग्नि परीक्षा' देने तक की इच्छा जताई थी।

सोशल मीडिया पर 'न्याय' की मांग

साध्वी की मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम पर अपलोड हुई पोस्ट ने पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। समर्थकों का कहना है कि साध्वी को जीते जी न्याय नहीं मिला और वे समाज के तानों और साजिशकर्ताओं के जाल में फंसकर अपनी जान गंवा बैठीं। अब उनके अनुयायी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। ताकि उन लोगों को सजा मिल सके जिन्होंने साध्वी को इस हद तक प्रताड़ित किया।

[DISCLAIMER_START] यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। ज़ूम न्यूज़ किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है। मामले की आधिकारिक जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

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