राजस्थान हाईकोर्ट में आज एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिल रही है। जनवरी महीने का आज चौथा शनिवार है और हाईकोर्ट प्रशासन के आदेशानुसार आज अदालत खुली है। हालांकि, वकीलों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब हाईकोर्ट प्रशासन ने लंबित मामलों के निपटारे के लिए वर्किंग डेज बढ़ाने का फैसला किया।
प्रशासन का फैसला और वकीलों का गुस्सा
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने पूर्ण पीठ (Full Court) के निर्णय के तहत वर्ष 2026 के पहले चौथे शनिवार को वर्किंग डे घोषित किया है और इसके साथ ही हाईकोर्ट प्रशासन ने शनिवार के लिए कॉज लिस्ट (वाद सूची) भी जारी कर दी थी। इस निर्णय के सामने आते ही वकीलों में भारी रोष व्याप्त हो गया। वकीलों का तर्क है कि शनिवार की छुट्टी उनके लिए शोध और अन्य कानूनी तैयारियों के लिए आवश्यक होती है।
बार एसोसिएशन का कड़ा रुख
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस फैसले के विरोध में एक ज्ञापन सौंपा है। बार के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने एग्जीक्यूटिव कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सर्वसम्मति से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया और सोगरवाल ने कहा कि वकीलों की भावनाओं और उनकी कार्यशैली को नजरअंदाज कर यह फैसला थोपा गया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
5 जजों की कमेटी और रिपोर्ट का सस्पेंस
उल्लेखनीय है कि साल की शुरुआत में जब जयपुर और जोधपुर बार ने इस निर्णय का। विरोध किया था, तब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने 5 जजों की एक विशेष कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को 21 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। अध्यक्ष राजीव सोगरवाल के अनुसार, कमेटी ने रिपोर्ट तो सौंप दी है, लेकिन उसके निष्कर्षों को बार के साथ साझा नहीं किया गया। शनिवार की कॉज लिस्ट जारी होना इस बात का संकेत है कि प्रशासन अपने फैसले पर अडिग है।
साल में 24 दिन अतिरिक्त काम का लक्ष्य
हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में 12 दिसंबर 2025 को यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था कि जनवरी से हाईकोर्ट हर महीने के दो शनिवार खुला रहेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सालभर में 24 दिन अतिरिक्त काम करना है। प्रशासन का मानना है कि इससे न्यायपालिका पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
लंबित मामलों के निपटारे की चुनौती
अदालतों में लगातार बढ़ते मामलों के दबाव को देखते हुए न्यायिक समय का विस्तार अनिवार्य माना जा रहा है। प्रशासन का तर्क है कि महीने के दो शनिवार काम होने से न केवल लंबित मामलों की संख्या कम होगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी, तेज और समयबद्ध बनेगी। हालांकि, वकीलों के बहिष्कार के कारण आज की कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।