जयपुर में आयोजित एक गरिमामय सेना परेड के दौरान गुरुवार को एक अत्यंत भावुक कर देने वाला पल सामने आया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया। यह घटना तब हुई जब एक शहीद जवान की मां अपने वीर सपूत को मरणोपरांत दिए गए सेना पदक (वीरता) को ग्रहण करने के लिए मंच पर पहुंचीं। अपने बेटे की शहादत और उस सम्मान के बोझ तले वह इतनी भावुक हो गईं कि मंच पर ही अचेत होकर गिर पड़ीं और इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर तुरंत मंच पर मौजूद एक सैनिक ने आगे बढ़कर उन्हें संभाला और सहारा दिया। यह क्षण न केवल शहीद के परिवार के लिए, बल्कि। पूरे देश के लिए उनके बलिदान की याद दिलाता है।
सेना परेड और सम्मान समारोह
राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार को भारतीय सेना द्वारा एक भव्य परेड का आयोजन किया गया था और इस समारोह का मुख्य उद्देश्य देश के वीर जवानों को उनकी असाधारण सेवा और वीरता के लिए सम्मानित करना था। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्वयं इस समारोह की अध्यक्षता की और कई बहादुर सैनिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पदकों से सम्मानित किया। यह अवसर देश के प्रति उनके समर्पण और बलिदान को स्वीकार करने का एक महत्वपूर्ण मंच था। परेड में सेना के विभिन्न अंगों के जवानों ने भाग लिया, जो उनकी अनुशासन और शक्ति का प्रदर्शन था।
शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार का सम्मान
इस सम्मान समारोह में, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कई वीर जवानों को मरणोपरांत सेना पदक (वीरता) प्रदान किए। इनमें लांस नायक प्रदीप कुमार, सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार और लांस नायक सुभाष कुमार जैसे बहादुर सैनिक शामिल थे, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन पदकों को उनके परिवारों के सदस्यों ने ग्रहण किया, जो उनके बलिदान का प्रतीक थे। यह पदक न केवल उनकी वीरता को मान्यता देते हैं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी गर्व का स्रोत हैं, जिन्होंने देश के लिए इतना बड़ा त्याग किया है।
मंच पर मां की भावुकता
लांस नायक प्रदीप कुमार की मां रामसनेही और उनकी पत्नी मनीषा अपने वीर बेटे के मरणोपरांत सेना पदक (वीरता) को ग्रहण करने के लिए मंच पर उपस्थित थीं और जैसे ही सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मां रामसनेही को उनके बेटे का पदक सौंपा, उस पल की गंभीरता और उनके बेटे के बलिदान की यादों ने उन्हें पूरी तरह से अभिभूत कर दिया। उनकी आंखें नम हो गईं और वह अपने भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाईं। यह एक ऐसा क्षण था जब एक मां का दर्द और गर्व एक साथ उमड़ पड़ा, और वह मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं और यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों के लिए अत्यंत मार्मिक था।
सैनिक द्वारा त्वरित सहायता
मां रामसनेही के बेहोश होते ही, मंच पर मौजूद एक सजग सैनिक ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। बिना किसी देरी के, उस सैनिक ने आगे बढ़कर मां रामसनेही को सहारा दिया और उन्हें गिरने से बचाया। सैनिक ने अत्यंत सम्मान और संवेदनशीलता के साथ उन्हें संभाला और मंच से नीचे सुरक्षित स्थान पर ले जाने में मदद की। यह घटना भारतीय सेना के मानवीय पक्ष को दर्शाती है, जहां न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि ऐसे भावुक क्षणों में भी अपने जवानों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और सम्मान प्रदर्शित किया जाता है। यह त्वरित कार्रवाई सैनिक के प्रशिक्षण और मानवीय मूल्यों का प्रमाण थी।
लांस नायक प्रदीप कुमार, पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) की पहली बटालियन के एक असाधारण रूप से बहादुर जवान थे। उन्होंने देश की सेवा में अपनी जान न्योछावर कर दी। उनकी शहादत आतंकवादियों के साथ एक भीषण मुठभेड़ के दौरान हुई थी। इस मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अपनी चोटों के कारण, वह बच नहीं सके और देश के लिए शहीद हो गए। उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा, और वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
कुलगाम में अंतिम ऑपरेशन
6 जुलाई 2024 को, लांस नायक प्रदीप कुमार कुलगाम गांव में एक महत्वपूर्ण सर्च ऑपरेशन पर ड्यूटी पर थे। यह ऑपरेशन आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया जा रहा था। ऑपरेशन के दौरान, एक घर में छिपे आतंकवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। लांस नायक प्रदीप कुमार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक आतंकवादी को मार गिराया और इस भीषण संघर्ष के दौरान, दूसरा आतंकवादी भी मारा गया, लेकिन दुर्भाग्यवश, लांस नायक प्रदीप कुमार भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान
कुलगाम में हुई मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने के बाद, लांस नायक प्रदीप कुमार ने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और उनकी शहादत देश की सुरक्षा और अखंडता को बनाए रखने के लिए भारतीय सेना के अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्हें मरणोपरांत सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया, जो उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्य के प्रति समर्पण और देश के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का सम्मान है। लांस नायक प्रदीप कुमार का नाम भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।