राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए प्रदेश के तीन प्रसिद्ध शहरों के नाम बदलने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू, जहाजपुर और कामां के नामों में परिवर्तन किया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन को सूचित किया कि इन स्थानों के नए नाम उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएंगे। इस घोषणा के बाद प्रशासनिक स्तर पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
माउंट आबू का नया नाम 'आबू राज'
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के अनुसार, सिरोही जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माउंट आबू का नाम बदलकर अब 'आबू राज' कर दिया गया है। माउंट आबू न केवल राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है, बल्कि यह अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर और प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिरों के लिए भी जाना जाता है और सरकारी सूत्रों के अनुसार, 'आबू राज' नाम इस क्षेत्र की प्राचीन पहचान और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इस बदलाव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर इस स्थान की सांस्कृतिक जड़ों को और अधिक मजबूती से प्रस्तुत करना है।
जहाजपुर और कामां के नामों में ऐतिहासिक बदलाव
माउंट आबू के साथ-साथ दो अन्य महत्वपूर्ण शहरों के नाम भी बदले गए हैं। भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर का नाम बदलकर अब 'यज्ञपुर' कर दिया गया है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का संबंध प्राचीन यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों से रहा है, जिसके आधार पर इसे 'यज्ञपुर' नाम दिया गया है। वहीं, डीग जिले (पूर्व में भरतपुर का हिस्सा) में स्थित कामां का नाम बदलकर 'कामवन' कर दिया गया है। कामां क्षेत्र को ब्रज भूमि का हिस्सा माना जाता है और धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख 'कामवन' के रूप में मिलता है। अधिकारियों के अनुसार, ये नाम परिवर्तन स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित हैं।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पूर्व में हुए नाम परिवर्तन
राजस्थान सरकार का यह निर्णय देश के अन्य राज्यों में चल रही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के अनुरूप देखा जा रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने कई प्रमुख शहरों के नाम बदले हैं, जिनमें फैजाबाद को अयोध्या और इलाहाबाद को प्रयागराज करना शामिल है। इसी तरह, दिल्ली में भी कई सड़कों और मेट्रो स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। हाल ही में दिल्ली में उत्तरी पीतमपुरा-प्रशांत विहार, जगतपुर-वजीराबाद, नानक प्याऊ-डेरावल नगर और श्री राम मंदिर मयूर विहार जैसे नामों को आधिकारिक मंजूरी दी गई है। यह प्रक्रिया सार्वजनिक स्थानों को उनकी स्थानीय और सांस्कृतिक पहचान देने के प्रयास के रूप में रिपोर्ट की गई है।
केरल से 'केरलम' बनने की संवैधानिक प्रक्रिया
नाम परिवर्तन की इस कड़ी में केरल राज्य का उदाहरण भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। भाषाई विशेषज्ञों के अनुसार, मलयालम में 'केरा' का अर्थ नारियल का पेड़ और 'अलम' का अर्थ भूमि होता है, जिससे 'केरलम' का अर्थ 'नारियल के पेड़ों की भूमि' निकलता है। हालांकि स्थानीय स्तर पर लोग इसे केरलम ही कहते थे, लेकिन अब इसे आधिकारिक और संवैधानिक रूप से मान्यता देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राजस्थान में भी इसी तरह की विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से नए नामों को सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया जाएगा।
प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया का अगला चरण
मुख्यमंत्री की सदन में घोषणा के बाद अब संबंधित विभागों द्वारा आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत राजस्व रिकॉर्ड, साइनबोर्ड, डाक पते और सरकारी दस्तावेजों में पुराने नामों को नए नामों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन परिवर्तनों को लागू करने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करें। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक पहचान को प्रभावित करेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार के संदर्भ में भी नई ब्रांडिंग के रूप में देखा जा रहा है और सरकार के अनुसार, इन नामों का चयन गहन शोध और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
