राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े ₹960 करोड़ के कथित घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है। सोमवार को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को उनकी तीन दिवसीय रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद जयपुर कलेक्ट्रेट स्थित एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता और पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए सुबोध अग्रवाल को दो दिन की और पुलिस रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट की कार्यवाही और रिमांड विस्तार
एसीबी के अधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी से अभी और पूछताछ की आवश्यकता है। अधिकारियों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल से पिछले तीन दिनों में लंबी पूछताछ की गई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अभी स्पष्टता आना बाकी है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद रिमांड अवधि को दो दिन के लिए बढ़ा दिया। पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ वहां मौजूद रही।
जांच की दिशा पर सुबोध अग्रवाल के गंभीर आरोप
अदालत परिसर में पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और उनके पास जो भी जानकारी थी, वह साझा कर चुके हैं। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां उन मामलों पर ध्यान नहीं दे रही हैं जहां वास्तव में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह बार-बार अधिकारियों से कह रहे हैं कि जहां पैसा लिया गया है, उसकी जांच नहीं की जा रही है, जबकि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।
कार्यकाल और फाइनेंस कमेटी का विवरण
सुबोध अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का विवरण देते हुए बताया कि वह 18 अप्रैल 2022 से 17 मई 2023 तक जलदाय विभाग की फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन रहे थे। उनके अनुसार, फाइनेंस कमेटी के कुल 37 मामलों में से केवल 4 मामले उनके कार्यकाल के हैं। उन्होंने दावा किया कि शेष 33 प्रकरण उनसे पहले के अधिकारियों के समय के हैं, जिनकी कुल राशि करीब ₹600 करोड़ बताई जा रही है। अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उनके समय में लिए गए निर्णयों में नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था।
अंतरिम जमानत याचिका हुई खारिज
सुनवाई के दौरान सुबोध अग्रवाल के वकील ने मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। वकील ने दलील दी कि अग्रवाल की सास का निधन हो गया है, इसलिए उन्हें तेरहवीं के संस्कारों में शामिल होने के लिए जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, एसीबी कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और जांच के वर्तमान चरण को देखते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी की उपस्थिति जांच के लिए अनिवार्य है और इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं होगा।
एसीबी की पूछताछ और 125 सवालों की सूची
एसीबी के सूत्रों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के लिए करीब 125 सवालों की एक विस्तृत सूची तैयार की गई है। इन सवालों में मुख्य रूप से टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाने और वित्तीय स्वीकृतियों में बरती गई कथित लापरवाही पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पिछले तीन दिनों में हुई पूछताछ में कई फाइलों और दस्तावेजों का मिलान किया गया है। अब अगले दो दिनों की रिमांड के दौरान एसीबी अन्य आरोपियों के साथ उनके संबंधों और लेन-देन के सबूतों को पुख्ता करने की कोशिश करेगी।
