चांदी में ₹27,000 की भारी गिरावट, सोने के दाम भी लुढ़के

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में ₹26,850 की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के रुख के कारण सोने के भाव में भी ₹2,310 की कमी आई है। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के बीच कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

भारतीय वायदा बाजार में गुरुवार को कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर रुझानों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच सोने और चांदी की कीमतों में दो सत्रों की तेजी के बाद बड़ी गिरावट दर्ज की गई और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है। यह गिरावट वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीतियों में बदलाव और डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती के कारण देखी जा रही है।

घरेलू बाजार में चांदी और सोने के ताजा भाव

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च की डिलीवरी वाली चांदी की कीमत ₹26,850 यानी करीब 10 प्रतिशत गिरकर ₹2,42,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2,68,850 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी। चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी नरमी देखी गई। 51 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,50,736 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। बुधवार को सोना ₹1,53,046 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। बाजार के जानकारों का कहना है कि कीमतों में यह सुधार हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली और वैश्विक कारकों के संयोजन का परिणाम है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का रुख

वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का रुख रहा। 55 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई। 38 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक चली गई थी। 9 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इससे पिछले सत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने 5000 अमेरिकी डॉलर का महत्वपूर्ण स्तर पार किया था, लेकिन यह बढ़त बरकरार नहीं रह सकी।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और आर्थिक कारक

ऑगमोंट की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने और चांदी ने अपनी हालिया बढ़त खो दी है, जिससे दो दिनों से जारी तेजी का सिलसिला समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि बाजारों में कीमती धातुओं पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है और अस्थिरता में वृद्धि हुई है। इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों में कटौती की धीमी गति की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं में कीमती धातुओं की खरीद महंगी हो जाती है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है और बिकवाली तेज होती है।

बाजार की आगामी स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी और अन्य औद्योगिक धातुओं की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहने की संभावना है क्योंकि हालिया तेजी के बाद बाजार में स्थिरता की कमी देखी जा रही है। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों और मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर वैश्विक निवेशकों की नजर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक डॉलर इंडेक्स में मजबूती बनी रहेगी, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना सीमित रह सकती है और वर्तमान में बाजार पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक संकेतकों और भू-राजनीतिक गतिविधियों से संचालित हो रहा है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की उम्मीद है।

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