सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: चांदी तीन दिन में ₹1.60 लाख सस्ती

बजट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट देखी गई। वायदा बाजार में चांदी तीन दिनों में ₹1.60 लाख गिरकर ₹2.41 लाख प्रति किलो पर आ गई, वहीं सोना ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विशेषज्ञों ने इसे मुनाफावसूली और मार्जिन मनी में बढ़ोतरी का परिणाम बताया है।

भारतीय कमोडिटी बाजार में बजट 2025 के बाद सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट का सिलसिला जारी है। 2 फरवरी को लगातार तीसरे दिन बहुमूल्य धातुओं के दाम में बड़ी कटौती दर्ज की गई। 41 लाख के स्तर पर आ गया। 40 लाख पर ट्रेड कर रहा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और वैश्विक स्तर पर मार्जिन मनी में की गई वृद्धि के कारण देखी जा रही है।

वायदा और सर्राफा बाजार में कीमतों का तुलनात्मक विवरण

वायदा बाजार के साथ-साथ हाजिर यानी सर्राफा बाजार में भी कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, सर्राफा बाजार में आज चांदी ₹29,255 सस्ती होकर ₹2,36,496 प्रति किलो पर आ गई है। वहीं, 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹6,427 गिरकर ₹1,42,270 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। पिछले तीन दिनों के रुझान को देखें तो एमसीएक्स पर सोने के दाम में कुल ₹30,000 की कमी आई है। 40 लाख पर आ गया है। 41 लाख पर पहुंच गई है।

गिरावट के मुख्य कारण: मुनाफावसूली और मांग में कमी

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़ी गिरावट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला कारण 'प्रॉफिट बुकिंग' या मुनाफावसूली है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों में जो असाधारण तेजी देखी गई थी, उसके बाद निवेशकों ने ऊंचे भाव पर अपनी पोजीशन काटकर मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है और दूसरा महत्वपूर्ण कारण फिजिकल डिमांड यानी भौतिक मांग में आई कमी है। कीमतों के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के कारण घरेलू बाजार में आभूषणों की मांग कमजोर हुई है। इसके अतिरिक्त, चांदी के औद्योगिक उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं ने भी कीमतों पर दबाव डाला है।

मार्जिन मनी में बढ़ोतरी और तकनीकी दबाव

सेबी पंजीकृत कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) द्वारा मार्जिन मनी में की गई वृद्धि ने कीमतों को नीचे धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है। सीएमई ने सोने पर मार्जिन को 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। कमोडिटी ट्रेडिंग में मार्जिन वह सुरक्षा राशि होती है जो ट्रेडर्स को सौदा करने के लिए एक्सचेंज के पास जमा करनी पड़ती है। मार्जिन बढ़ने का सीधा अर्थ है कि अब ट्रेडर्स को समान मात्रा में व्यापार करने के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी। जिन ट्रेडर्स के पास अतिरिक्त फंड नहीं था, उन्हें अपनी पोजीशन बेचनी पड़ी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतें तेजी से नीचे आईं।

उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी के मानक और शुद्धता की पहचान

कीमतों में गिरावट के बीच विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। सोने की खरीदारी करते समय हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क जरूर देखना चाहिए और हॉलमार्किंग में एक अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) होता है, जो सोने की शुद्धता और कैरेट की पुष्टि करता है। इसके अलावा, खरीदारी से पहले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट से कीमतों का मिलान करना आवश्यक है। चांदी की शुद्धता जांचने के लिए मैग्नेट टेस्ट (असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती), आइस टेस्ट (असली चांदी पर बर्फ तेजी से पिघलती है), स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे घरेलू तरीकों का उपयोग किया जा सकता है।

बाजार विश्लेषण और भविष्य की स्थिति

विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान में बाजार तकनीकी सुधार के दौर से गुजर रहा है। मार्जिन मनी में वृद्धि और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच सोने-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बाजार में तरलता और मार्जिन की स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव देखे जा सकते हैं। हालांकि, औद्योगिक मांग और केंद्रीय बैंकों की स्वर्ण खरीद जैसे कारक लंबी अवधि में कीमतों की दिशा निर्धारित करेंगे। फिलहाल, बाजार में बिकवाली का दौर हावी है और निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

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