केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है और यह प्रतिक्रिया टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक डेटा के बाद आई है। मस्क ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया था कि भारत और चीन मिलकर वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रिजिजू ने इस अवसर का उपयोग राहुल गांधी को यह समझाने के लिए किया कि राजनीतिक विरोध और राष्ट्र के सम्मान के बीच एक स्पष्ट रेखा होनी चाहिए।
एलन मस्क की पोस्ट और आर्थिक आंकड़े
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एलन मस्क ने एक पोस्ट साझा की जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य के रुझानों को दर्शाया गया था। 6% का योगदान देने की राह पर हैं। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इसके महत्व को रेखांकित करता है। किरेन रिजिजू ने इसी पोस्ट को आधार बनाकर विपक्ष के उन दावों को चुनौती दी है जिनमें भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को चिंताजनक बताया गया था।
लोकतांत्रिक अधिकार बनाम राष्ट्र का सम्मान
किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करना न केवल एक अधिकार है, बल्कि एक आवश्यक प्रक्रिया भी है और हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि आलोचना के नाम पर भारत की उपलब्धियों को कमतर आंकना या देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीचा दिखाना गलत है। रिजिजू के अनुसार, एक भारतीय नागरिक और विशेष रूप से एक जिम्मेदार नेता के रूप में, देश की प्रगति पर गर्व करना अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मतभेदों को राष्ट्रीय गौरव के आड़े नहीं आना चाहिए।
राहुल गांधी की आर्थिक नीतियों पर आलोचना
विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया था। गांधी ने बेरोजगारी, विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती, और घरेलू बचत में गिरावट जैसे मुद्दों को उठाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण स्थिति में बताया था। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि बजट में आम आदमी और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल चुनिंदा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
बजट 2026-27 और सरकार का दृष्टिकोण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए लगातार नौवें बजट को सरकार ने 'विकसित भारत' की दिशा में एक रोडमैप बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम करार दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य विनिर्माण और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना है।
विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य और निष्कर्ष
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, किरेन रिजिजू का बयान भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह वैश्विक प्रशंसा को घरेलू राजनीति में ढाल के रूप में उपयोग करती है। एलन मस्क जैसे वैश्विक दिग्गजों की टिप्पणियों को सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की सफलता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है और दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि व्यापक आर्थिक आंकड़े जमीनी स्तर पर बेरोजगारी और मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। निष्कर्षतः, भारत की आर्थिक वृद्धि पर वैश्विक डेटा और घरेलू राजनीतिक विमर्श के बीच यह टकराव आने वाले समय में और तीव्र होने की संभावना है।
Hon'ble PM has given top priority to North-East and Eastern India. I'm happy that my colleague Union Minister and MP from Assam Shri @sarbanandsonwal Ji will move the motion of thanks to Hon'ble President for addressing joint session of Parliament & initiate discussion today. https://t.co/i6gqtvYSNN
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) February 2, 2026
