पान मसाला पर 88% टैक्स: वित्त वर्ष 2027 तक ₹14,000 करोड़ राजस्व का अनुमान

केंद्र सरकार ने पान मसाला पर कुल कर भार बढ़ाकर 88 प्रतिशत कर दिया है। इसमें 40 प्रतिशत जीएसटी के साथ उत्पादन क्षमता आधारित स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर शामिल है। सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में इस नए उपकर से ₹14,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

भारत सरकार ने पान मसाला उद्योग के लिए एक नई कर संरचना लागू की है, जिसके तहत कुल कर भार अब 88 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इस नई व्यवस्था में 40 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अतिरिक्त एक नया 'स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर' (HNSC) शामिल किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में केवल इस उपकर के माध्यम से ₹14,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। यह कदम तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर कर ढांचे को सुव्यवस्थित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संसाधन जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

उपकर की संरचना और गणना पद्धति

नई कर व्यवस्था के तहत, पान मसाला पर लगाया जाने वाला स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगा। यह उपकर मौजूदा 40 प्रतिशत जीएसटी से पूरी तरह अलग है। विशेष बात यह है कि इस उपकर की गणना पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की वास्तविक बिक्री के बजाय उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर की जाएगी और इस पद्धति का उद्देश्य कर चोरी को रोकना और विनिर्माण स्तर पर ही राजस्व सुनिश्चित करना है। जीएसटी और नए उपकर को मिलाकर पान मसाला पर कुल प्रभावी कर की दर 88 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो इस श्रेणी के उत्पादों पर अब तक के उच्चतम कर स्तरों में से एक है।

राजस्व संग्रह का लक्ष्य और समयसीमा

बजट दस्तावेजों और सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस नए उपकर से राजस्व संग्रह के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के अंतिम दो महीनों, यानी फरवरी और मार्च 2026 के दौरान, सरकार को ₹2,330 करोड़ जुटाने की उम्मीद है। इसके बाद, पूर्ण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य बढ़ाकर ₹14,000 करोड़ कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह राजस्व प्रवाह सरकार के राजकोषीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा और विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक समर्पित निधि के रूप में कार्य करेगा।

राज्यों के साथ राजस्व साझाकरण और उपयोग

पान मसाला की उत्पादन क्षमता पर लगाए गए इस सेस से प्राप्त होने वाली राशि को राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। इस धन का उपयोग मुख्य रूप से स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए किया जाएगा। दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए वक्तव्य के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि इस 'हेल्थ सेस' का प्राथमिक उद्देश्य स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए एक अनुमानित और समर्पित संसाधन प्रवाह सुनिश्चित करना है। संसद ने दिसंबर में ही पान मसाला पर इस उपकर और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी।

जीएसटी परिषद का निर्णय और ऋण अदायगी

यह बदलाव जीएसटी परिषद द्वारा सितंबर 2025 में लिए गए एक बड़े नीतिगत निर्णय का परिणाम है। परिषद ने तय किया था कि राज्यों को जीएसटी राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए लिया गया ऋण चुकाने के बाद 'मुआवजा उपकर' (Compensation Cess) समाप्त कर दिया जाएगा। 69 लाख करोड़ का ऋण चुकाए जाने का अनुमान है। इसके बाद, मुआवजा उपकर के स्थान पर पान मसाला और तंबाकू जैसे उत्पादों पर नए प्रकार के उपकर और उत्पाद शुल्क लगाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

विश्लेषकों के अनुसार प्रभाव

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कर की दरों में इस भारी वृद्धि का सीधा असर पान मसाला की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है और उत्पादन क्षमता आधारित कराधान मॉडल से विनिर्माताओं के लिए परिचालन लागत में वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम न केवल राजस्व बढ़ाने के लिए है, बल्कि उच्च कराधान के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के उपभोग को हतोत्साहित करने की नीति का भी हिस्सा है और कर विशेषज्ञों के अनुसार, यह नई व्यवस्था कर प्रशासन में पारदर्शिता लाएगी और विनिर्माण इकाइयों की निगरानी को और अधिक सख्त बनाएगी।

निष्कर्ष के रूप में, पान मसाला पर 88 प्रतिशत कर का प्रावधान सरकार की दोहरी रणनीति को दर्शाता है, जिसमें राजस्व सृजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों शामिल हैं। वित्त वर्ष 2026-27 तक ₹14,000 करोड़ का लक्ष्य इस क्षेत्र में होने वाले बड़े आर्थिक बदलावों का संकेत देता है।

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