संसद के बजट सत्र के महत्वपूर्ण चरण में आज लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने जा रही है। यह चर्चा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में दिए गए संबोधन के बाद आयोजित की जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लोकसभा में दोपहर 12 बजे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल इस चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस प्रस्ताव का समर्थन सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा किया जाएगा। सदन में इस चर्चा के लिए कुल 18 घंटे का समय आवंटित किया गया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
राज्यसभा में कार्यवाही का विवरण
लोकसभा के साथ-साथ उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्यसभा में दोपहर 2 बजे से चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। भाजपा की ओर से सदानंद मास्टर चर्चा का शुभारंभ करेंगे। राज्यसभा में भी विभिन्न दलों के नेताओं को उनकी सदस्य संख्या के आधार पर समय आवंटित किया गया है। राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और पिछले कार्यों का एक विस्तृत खाका होता है, जिस पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गहन विमर्श की परंपरा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संभावित संबोधन
संसदीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हो रही इस चर्चा का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ होगा और प्रधानमंत्री संभवतः 4 फरवरी को लोकसभा में चर्चा का जवाब देंगे। प्रधानमंत्री का यह भाषण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें वे विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों का उत्तर देने के साथ-साथ सरकार के विजन को भी स्पष्ट करते हैं। बजट 2026 की प्रस्तुति के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला प्रमुख संसदीय संबोधन होगा, जिस पर राजनीतिक विश्लेषकों की गहरी नजर बनी हुई है।
बजट सत्र की पृष्ठभूमि और महत्व
संसद का वर्तमान बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ था। सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित किया था। इसके पश्चात, 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में की गई घोषणाओं और सरकार की आर्थिक नीतियों की पृष्ठभूमि में यह धन्यवाद प्रस्ताव चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करता है और संविधान के अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति का अभिभाषण एक अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके बाद सदन द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया जाना आवश्यक होता है।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और निष्कर्ष
संसदीय विश्लेषकों के अनुसार, धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। जहां सत्ता पक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित उपलब्धियों को रेखांकित करेगा, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और हालिया बजट प्रस्तावों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकता है। 18 घंटे की यह लंबी चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाती है। प्रधानमंत्री के जवाब के बाद, प्रस्ताव पर मतदान होगा और इसे पारित किया जाएगा। यह सत्र विधायी कार्यों और नीतिगत चर्चाओं के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
