बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शेख हसीना के नेतृत्व वाली आवामी लीग, जो वर्तमान में बांग्लादेश में प्रतिबंधित है, भारत के विभिन्न शहरों से अपनी राजनीतिक वापसी की जमीन तैयार कर रही है। ढाका की सत्ता से बेदखल होने के बाद यह पहला अवसर है जब देश बिना आवामी लीग की प्रत्यक्ष भागीदारी के चुनाव की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार, शेख हसीना दिल्ली के एक सुरक्षित स्थान से पार्टी की गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, जबकि कोलकाता में मौजूद वरिष्ठ नेता संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए निरंतर बैठकें कर रहे हैं।
जुलाई 2024 का घटनाक्रम और सत्ता परिवर्तन
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में जुलाई 2024 एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। एक व्यापक जनआंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से इस्तीफा देकर हेलीकॉप्टर के जरिए भारत शरण लेनी पड़ी थी। संयुक्त राष्ट्र की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान हुई हिंसा में लगभग 1400 लोगों की जान गई थी। हसीना के प्रस्थान के बाद आवामी लीग के हजारों कार्यकर्ता और नेता भी देश छोड़कर चले गए। वर्तमान में लगभग 600 से अधिक वरिष्ठ नेता कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां से वे पार्टी के भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
भारत में संगठनात्मक ढांचा और गुप्त बैठकें
सूत्रों के अनुसार, आवामी लीग का नेतृत्व भारत में दो मुख्य केंद्रों, दिल्ली और कोलकाता से संचालित हो रहा है। दिल्ली में शेख हसीना की मौजूदगी पार्टी के लिए एक वैचारिक और रणनीतिक केंद्र का काम कर रही है। कोलकाता में रह रहे नेताओं को नियमित अंतराल पर दिल्ली बुलाया जाता है, जहां आगामी चुनावों को लेकर चर्चा की जाती है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के दिन और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान अंतरिम सरकार की वैधता को चुनौती दी जा सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि भौतिक रूप से अनुपस्थित रहने के बावजूद वे डिजिटल और जमीनी नेटवर्क के माध्यम से प्रभाव डाल सकते हैं।
चुनाव बहिष्कार और वैधता को चुनौती देने की योजना
मई 2024 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आवामी लीग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके कारण पार्टी आधिकारिक तौर पर चुनाव नहीं लड़ सकती। इस प्रतिबंध के जवाब में आवामी लीग ने चुनाव को 'फर्जी' करार दिया है और अपने समर्थकों से मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का आह्वान किया है। पार्टी की रणनीति यह है कि यदि मतदान का प्रतिशत कम रहता है, तो वे इसे अंतरिम सरकार की विफलता और जनता के अविश्वास के रूप में पेश करेंगे और विश्लेषकों के अनुसार, आवामी लीग का लक्ष्य चुनावी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदिग्ध बनाना है ताकि भविष्य में उनकी वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सके।
कानूनी बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय दबाव
शेख हसीना और उनके सहयोगियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में चल रहे कानूनी मामले हैं। एक विशेष वॉर क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए सजा सुनाई है। हालांकि, आवामी लीग इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने स्पष्ट किया है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे, लेकिन आवामी लीग के नेताओं का तर्क है कि उनके बिना कोई भी चुनाव समावेशी नहीं हो सकता। विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी अब इस उम्मीद में है कि चुनाव के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर वे फिर से मुख्यधारा में लौट सकेंगे।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और निष्कर्ष
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आवामी लीग की अनुपस्थिति में होने वाले ये चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए एक परीक्षा की तरह हैं और जहां एक ओर अंतरिम सरकार देश में सुधारों का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आवामी लीग का निर्वासन में रहकर सक्रिय होना एक निरंतर दबाव बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी की भविष्य की रणनीति पूरी तरह से 12 फरवरी के मतदान के परिणामों और उसके बाद की वैश्विक प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। फिलहाल, भारत से संचालित हो रही यह राजनीतिक गतिविधियां ढाका के सत्ता गलियारों में चिंता का विषय बनी हुई हैं।
