युमनाम खेमचंद सिंह चुने गए मणिपुर भाजपा विधायक दल के नेता, बनेंगे मुख्यमंत्री

मणिपुर में राजनीतिक गतिरोध के बीच भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना है। दिल्ली में हुई बैठक के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 62 वर्षीय खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं और पूर्व में मंत्री रह चुके हैं।

मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अनिश्चितता और राष्ट्रपति शासन के बीच भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के नेतृत्व को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। दिल्ली में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से नेता चुना गया है। इस निर्णय के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि खेमचंद सिंह मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे और पार्टी सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 4 फरवरी को आयोजित किया जा सकता है।

युमनाम खेमचंद सिंह: एक अनुभवी चेहरा और राजनीतिक पृष्ठभूमि

62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली व्यक्तित्व माने जाते हैं। वह इंफाल पश्चिम जिले की सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं। पेशे से इंजीनियर रहे खेमचंद सिंह ने पिछली एन. बीरेन सिंह सरकार में नगर प्रशासन, आवास और शहरी विकास मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। वह मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का करीबी माना जाता है। उल्लेखनीय है कि 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम प्रमुखता से उभरा था।

दिल्ली में हुई विधायक दल की बैठक और चयन प्रक्रिया

मणिपुर में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। सुरक्षा और अन्य संवेदनशीलता को देखते हुए यह बैठक इंफाल के बजाय दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विधायकों ने खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगाई। इस अवसर पर तरुण चुग और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बधाई दी। बताया जा रहा है कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब सभी विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करने के लिए राष्ट्रपति भवन जा सकते हैं।

राष्ट्रपति शासन की समाप्ति और नई सरकार की चुनौतियां

मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद प्रशासनिक अस्थिरता पैदा हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। अगस्त 2025 में इसे छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। अब केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन हटाने की प्रक्रिया शुरू कर रही है और नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शांति स्थापित करना और विस्थापित हुए हजारों लोगों का पुनर्वास करना होगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जातीय संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

मणिपुर विधानसभा का गणित और राजनीतिक समीकरण

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति काफी मजबूत है। भाजपा के पास वर्तमान में 37 विधायक हैं, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। इसके अतिरिक्त, एनडीए के सहयोगी दलों में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के 5 विधायक शामिल हैं। मुख्यमंत्री की दौड़ में गोविंद दास कोंथौजम और टी. विश्वजीत सिंह के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने खेमचंद सिंह के अनुभव और स्वीकार्यता पर भरोसा जताया है।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भविष्य की राह

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खेमचंद सिंह का चयन राज्य में संतुलन बनाने की एक कोशिश है। उनकी छवि एक शांत और समावेशी नेता की रही है, जो वर्तमान परिस्थितियों में राज्य को स्थिरता प्रदान करने में सहायक हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार का प्राथमिक एजेंडा कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाना होगा। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रिमंडल के गठन में भी क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है।

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