भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को लेकर देश में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह समझौता देश के हितों के खिलाफ है और राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री बाहरी दबाव में काम कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक है और इससे किसानों व डेयरी क्षेत्र के हितों को कोई नुकसान नहीं होगा।
राहुल गांधी के आरोप और अडाणी मामले का संदर्भ
राहुल गांधी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी ट्रेड डील में देश के हितों के साथ समझौता किया है और उन्होंने कहा कि अमेरिका में अडाणी समूह पर चल रहे कानूनी मामले और कथित 'एपस्टीन फाइल्स' के कारण प्रधानमंत्री दबाव में हैं। राहुल गांधी के अनुसार, प्रधानमंत्री की छवि बनाने वाली शक्तियां ही अब उसे प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता विपक्ष को बोलने से रोका गया है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का 'फाइनेंशियल स्ट्रक्चर' अब अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में है, जिससे उनकी निर्णय क्षमता प्रभावित हो रही है।
सरकार का पक्ष और पीयूष गोयल का स्पष्टीकरण
राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने चार मुख्य बिंदुओं पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग कर भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ डील हासिल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। सरकार के अनुसार, यह समझौता 140 करोड़ भारतीयों, विशेषकर गरीबों, किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। गोयल ने विपक्ष पर राजनीतिक अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे भारत का उज्ज्वल भविष्य नहीं देखना चाहते।
व्यापार समझौते की मुख्य शर्तें और ट्रम्प का बयान
इस विवाद की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने भारत के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की। ट्रम्प ने बताया कि भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को घटाकर अब 18% कर दिया गया है। इसके बदले में भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोयला उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए एक बड़ी जीत बताया और राष्ट्रपति ट्रम्प का आभार व्यक्त किया।
कांग्रेस की चिंताएं और कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव
कांग्रेस पार्टी ने इस समझौते को लेकर कई तकनीकी और आर्थिक सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे भारतीय हितों का समर्पण करार दिया। पार्टी का मुख्य तर्क यह है कि अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस के बयानों से स्पष्ट होता है कि यह डील अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार तक पहुंच देने के लिए की गई है। कांग्रेस के अनुसार, यदि अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बिना किसी बाधा के आते हैं, तो स्थानीय किसानों को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि यह समझौता ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकता है और सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भविष्य का प्रभाव
राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह व्यापार समझौता भारत की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका की ओर झुकाव बढ़ने से वैश्विक भू-राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 500 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव डाल सकता है, हालांकि टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को लाभ होने की संभावना है। आर्थिक जानकारों के अनुसार, इस समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन और इसके जमीनी प्रभावों को समझने के लिए आगामी साझा बयान का इंतजार करना होगा। फिलहाल, यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
