पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय चुनाव आयोग के बीच चल रहा गतिरोध अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है और सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के बीच ममता बनर्जी ने कोलकाता से पश्चिम बंगाल पुलिस की एक विशेष टुकड़ी को दिल्ली बुला लिया है और यह कदम चुनाव आयोग के साथ हुए हालिया विवाद और दिल्ली में उनके प्रवास के दौरान संभावित विरोध प्रदर्शनों की आशंकाओं के बीच उठाया गया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती और दिल्ली आगमन
मुख्यमंत्री की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए कोलकाता से एक विशेष दस्ता विमान के जरिए दिल्ली पहुंच रहा है। इस दस्ते में डीएसपी (DSP) रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी, एक इंस्पेक्टर, महिला पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 22 सदस्यीय टुकड़ी शामिल है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस विशेष बल को दिल्ली स्थित बंग भवन और पश्चिम बंगाल सरकार की अन्य संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है और यह पहली बार है जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने दिल्ली में अपनी सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी संख्या में अपने राज्य के विशेष बलों को तैनात किया है।
चुनाव आयोग के साथ बैठक और विवाद का कारण
विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई जब ममता बनर्जी एसआईआर (SIR) मुद्दे पर चर्चा करने के लिए चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंची थीं। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और एसआईआर प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य भी मौजूद थे। बैठक के दौरान माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब मुख्यमंत्री ने आयोग के अधिकारियों पर अहंकारी होने का आरोप लगाया। बैठक से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि आयोग का व्यवहार अपमानजनक था और उन्हें वहां न्याय नहीं मिला। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सीधे तौर पर पक्षपात करने और केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया।
आज के प्रस्तावित कार्यक्रम और राजनीतिक सरगर्मी
मंगलवार का दिन दिल्ली में राजनीतिक रूप से काफी गहमागहमी वाला रहने की उम्मीद है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 3:00 बजे ममता बनर्जी बंग भवन में एसआईआर पीड़ितों के साथ एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। इसके बाद शाम 4:00 बजे 181 साउथ एवेन्यू में उनकी ओर से एक 'हाई टी' पार्टी का आयोजन किया गया है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सभी सांसदों को आमंत्रित किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से ममता बनर्जी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपने रुख को और कड़ा कर सकती हैं।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और संवैधानिक टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एक राज्य की मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली में अपनी अलग सुरक्षा फोर्स बुलाना केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति संवैधानिक संस्थाओं और राज्य सरकार के बीच एक बड़े टकराव का संकेत है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री ने आयोग पर 'जमींदार' की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों की यह तैनाती दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र और राज्य पुलिस के समन्वय पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक गरमाने की संभावना है।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल दिल्ली स्थित बंग भवन की सुरक्षा को 'बुलेटप्रूफ' स्तर पर ले जाया गया है। बंगाल से आए विशेष सुरक्षा कर्मी तैनात हो चुके हैं और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय की कोशिशें जारी हैं। ममता बनर्जी का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि वह आगामी चुनावों और प्रशासनिक मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं हैं। आज होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके द्वारा किए जाने वाले खुलासे और भविष्य की रणनीति पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
