भारतीय शेयर बाजार में 3 फरवरी को जबरदस्त लिवाली देखी गई, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और भारत के बीच हुआ नया व्यापार समझौता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान किया है। 9% की छलांग लगाकर 84,000 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। 9% की बढ़त के साथ 25,800 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह तेजी वैश्विक व्यापार संबंधों में आए सकारात्मक बदलाव और निर्यात आधारित क्षेत्रों में बढ़ी उम्मीदों का परिणाम है।
क्षेत्रवार प्रदर्शन और रियल्टी-IT में भारी खरीदारी
बाजार में आई इस तेजी का नेतृत्व रियल्टी, ऑटो और आईटी क्षेत्रों ने किया है। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में लगभग 5% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। आईटी और ऑटो इंडेक्स भी पीछे नहीं रहे और दोनों में 4% तक की तेजी देखी गई। इसके अतिरिक्त, निफ्टी मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और बैंकिंग इंडेक्स में भी लगभग 3% का उछाल आया है। निफ्टी 50 के कुल 50 शेयरों में से 46 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं, जबकि केवल 4 शेयरों में मामूली गिरावट देखी गई है। यह व्यापक स्तर की खरीदारी दर्शाती है कि बाजार के हर क्षेत्र में सकारात्मक धारणा बनी हुई है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की मुख्य शर्तें और प्रभाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को स्पष्ट किया कि वे भारत के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के तहत, अमेरिका न केवल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करेगा, बल्कि भारत ने भी कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं जताई हैं। समझौते के अनुसार, भारत अब रूस से कच्चे तेल की खरीद को बंद करेगा और इसके बदले अमेरिका से ऊर्जा, उन्नत तकनीक और कृषि उत्पादों के आयात में वृद्धि करेगा और विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीतिक बदलाव भारत के ऊर्जा आयात बास्केट को विविधता प्रदान करेगा और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
निर्यात क्षेत्रों को मिलने वाले पांच प्रमुख लाभ
टैरिफ में इस भारी कटौती से भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे पहले, 'मेड इन इंडिया' उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और सस्ते होंगे, जिससे मांग में वृद्धि होगी। कपड़ा और परिधान क्षेत्र को सबसे बड़ा लाभ होगा क्योंकि भारत के कुल कपड़ा निर्यात का लगभग 28% हिस्सा अमेरिका जाता है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को नए और बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है और सीफूड और ज्वेलरी निर्यातकों के लिए भी लागत में कमी आएगी, जिससे उनके मुनाफे में सुधार होगा। अंततः, इस डील से विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय रुपये को भी मजबूती मिलने के आसार हैं।
वैश्विक बाजारों का रुख और संस्थागत निवेशकों की गतिविधि
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी तेजी का माहौल बना हुआ है और 02% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार में भी 2 फरवरी को डाउ जोंस और नैस्डैक मजबूती के साथ बंद हुए थे। हालांकि, निवेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 2 फरवरी को ₹1,859 करोड़ के शेयर बेचे थे, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹2,411 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। दिसंबर 2025 में FII द्वारा ₹34,350 करोड़ की बिकवाली के बावजूद DII ने ₹79,620 करोड़ का निवेश कर बाजार की तरलता बनाए रखी है।
बाजार का विश्लेषण और निष्कर्ष
1 फरवरी को पेश किए गए बजट में एसटीटी (STT) टैक्स बढ़ने की घोषणा के बाद बाजार में जो अस्थिरता देखी गई थी, वह अब काफी हद तक शांत होती दिख रही है। बजट के दिन सेंसेक्स 1,546 अंक गिरा था, लेकिन व्यापार समझौते की खबर ने बाजार को नई ऊर्जा दी है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील न केवल व्यापारिक घाटे को कम करने में मदद करेगी, बल्कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने का मार्ग प्रशस्त करेगी। आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस समझौते के कार्यान्वयन और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेगी।
