भारतीय सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 10 फरवरी को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक किलोग्राम चांदी की कीमत ₹3,759 की वृद्धि के साथ ₹2,57,424 पर पहुंच गई है। सोमवार को चांदी का भाव ₹2,53,665 प्रति किलो दर्ज किया गया था। इसी तरह, 24 कैरेट सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जहां 10 ग्राम सोने का भाव ₹824 बढ़कर ₹1,55,700 के स्तर को छू गया है।
बाजार की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक आंकड़े
सर्राफा बाजार में हालिया तेजी पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद सुधार के रूप में देखी जा रही है। इससे पहले शुक्रवार को चांदी की कीमत ₹2,44,929 प्रति किलो के स्तर पर थी, जिसमें अब दो दिनों के भीतर कुल ₹12,495 की वृद्धि हो चुकी है। ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो 29 जनवरी को सोने और चांदी दोनों ने अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) को छुआ था। उस समय सोने की कीमत ₹1,76,121 प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत ₹3,85,933 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। वर्तमान कीमतें उन उच्चतम स्तरों से अभी भी नीचे बनी हुई हैं।
कीमतों में क्षेत्रीय भिन्नता और IBJA का मानक
अक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह प्रश्न रहता है कि अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के रेट अलग क्यों होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, IBJA द्वारा जारी किए गए रेट्स में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का अपना मुनाफा शामिल नहीं होता है। यही कारण है कि स्थानीय सर्राफा बाजारों में कीमतें IBJA के आधिकारिक आंकड़ों से भिन्न हो सकती हैं। इन दरों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की दरें तय करने के लिए इन्हीं आंकड़ों का उपयोग करता है। इसके अतिरिक्त, कई वाणिज्यिक बैंक गोल्ड लोन की ब्याज दरें और ऋण राशि निर्धारित करने के लिए IBJA के बेंचमार्क का ही पालन करते हैं।
वर्ष 2025 और 2026 का तुलनात्मक प्रदर्शन
वर्ष 2025 बहुमूल्य धातुओं के लिए ऐतिहासिक रहा था। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सोने की कीमतों में 75% की भारी वृद्धि देखी गई थी। 31 दिसंबर 2024 को सोना ₹76,162 पर था, जो 31 दिसंबर 2025 तक ₹1,33,195 प्रति 10 ग्राम हो गया। चांदी के मामले में यह वृद्धि और भी अधिक 167% रही, जहां कीमतें ₹86,017 से बढ़कर ₹2,30,420 प्रति किलो तक पहुंच गईं। वर्ष 2026 के शुरुआती 41 दिनों में भी यह रुझान जारी है, जिसमें अब तक सोना ₹22,505 और चांदी ₹27,004 महंगी हो चुकी है।
शुद्धता की पहचान और उपभोक्ता जागरूकता
बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच शुद्धता सुनिश्चित करना ग्राहकों के लिए अनिवार्य है। सोने की खरीद के समय ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क देखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। हॉलमार्क में एक अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) होता है, जिसे HUID कहा जाता है। इससे सोने की शुद्धता और कैरेट का सटीक विवरण प्राप्त होता है। चांदी की शुद्धता जांचने के लिए भी कई पारंपरिक तरीके प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए, चांदी की उच्च तापीय चालकता के कारण उस पर बर्फ रखने से वह तेजी से पिघलती है। इसके अलावा, असली चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती है और सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान छोड़ती है।
बाजार विश्लेषण और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी में लगभग 15% की जो गिरावट आई थी, उसने खरीदारों को निचले स्तर पर प्रवेश करने का अवसर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों के स्थिर होने के साथ ही भौतिक मांग में सुधार देखा जा रहा है और हालांकि, बाजार की वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए विश्लेषकों का यह भी मानना है कि एकमुश्त बड़ी राशि के बजाय किश्तों में खरीदारी करना जोखिम प्रबंधन के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वैश्विक आर्थिक स्थितियों और मुद्रास्फीति के आंकड़ों का असर आने वाले समय में कीमतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
निष्कर्ष
सोने और चांदी की कीमतों में आई यह हालिया तेजी घरेलू मांग और वैश्विक बाजार के संकेतों का परिणाम है और जहां एक ओर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में इन धातुओं की ओर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शादियों के सीजन के कारण भौतिक मांग में भी निरंतरता बनी हुई है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी लेनदेन से पहले आधिकारिक स्रोतों से कीमतों की पुष्टि अवश्य करें और केवल प्रमाणित ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें।
