केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सेंट्रल बोर्ड का बड़ा विस्तार करते हुए तीन नए गैर-आधिकारिक सदस्यों की नियुक्ति पर मुहर लगा दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब बोर्ड के कुल सदस्यों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इन नियुक्तियों के माध्यम से सरकार ने बोर्ड में सार्वजनिक वित्त, कूटनीति और आर्थिक प्रबंधन के विशेषज्ञों को शामिल किया है। सभी नए सदस्यों का कार्यकाल पूरे चार साल की अवधि का होगा, या फिर सरकार के अगले आदेश तक वे अपने पद पर बने रहेंगे। यह विस्तार पिछले सप्ताह आनंद महिंद्रा और एस सोमनाथ की नियुक्ति के बाद किया गया है।
कानूनी प्रक्रिया और कार्यान्वयन
कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 8(1)(सी) के तहत इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को अपनी मंजूरी दी है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा शनिवार को जारी किए गए आदेश के बाद यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय बैंक के नीति-निर्धारण में विविधता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देना है, ताकि देश की मौद्रिक और वित्तीय प्रणालियों की निगरानी में विभिन्न पेशेवर दृष्टिकोणों को शामिल किया जा सके।
नए सदस्यों का परिचय और अनुभव
जिन तीन हस्तियों को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे अपने-अपने क्षेत्रों के दिग्गज माने जाते हैं। 66 वर्षीय सैयद अकबरुद्दीन एक अनुभवी पूर्व राजनयिक हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा, सैयद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के रूप में भी अपनी शानदार सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की विदेश नीति को प्रभावी ढंग से रखा। वर्तमान में वे हैदराबाद स्थित कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी से जुड़े हुए हैं और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं।
बोर्ड के दूसरे नए सदस्य 66 वर्षीय जन्मेजय कुमार सिन्हा हैं। सिन्हा एक जाने-माने अर्थशास्त्री और मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं। उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) में कई वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर कार्य किया है, जिसमें बीसीजी एशिया-पैसिफिक के अध्यक्ष का पद भी शामिल है। वे वित्तीय क्षेत्र के सुधारों से संबंधित कई महत्वपूर्ण सरकारी समितियों का हिस्सा रहे हैं और आर्थिक नीतियों की गहरी समझ रखते हैं और उनका प्रबंधन परामर्श का अनुभव बोर्ड की चर्चाओं में एक नया दृष्टिकोण लाएगा।
तीसरी सदस्य 62 वर्षीय एनी जॉर्ज मैथ्यू हैं। उनके पास पब्लिक फाइनेंस, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी ऑडिट के क्षेत्र में तीन दशक से भी ज्यादा का लंबा और समृद्ध अनुभव है और भारतीय लेखा परीक्षा तथा लेखा सेवा की अधिकारी रहीं मैथ्यू वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में विशेष सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वर्तमान में वे सोलहवें वित्त आयोग की पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। सरकारी वित्त और ऑडिटिंग प्रक्रियाओं की उनकी गहरी समझ आरबीआई सेंट्रल बोर्ड के लिए एक बड़ी संपत्ति साबित होगी।
बोर्ड की बढ़ती ताकत
इन तीन नए नामों के जुड़ने से आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की कार्यक्षमता और ताकत में काफी इजाफा हुआ है। नई नियुक्तियों से पहले, गवर्नर समेत बोर्ड के सदस्यों की कुल संख्या 11 थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर 14 पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा चुने गए ये विशेषज्ञ आगामी चार वर्षों तक भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णयों में अपनी भूमिका निभाएंगे। गैर-आधिकारिक पदों को भरने का सरकार का यह निर्णय केंद्रीय बैंक के कामकाज में स्वतंत्र निगरानी के महत्व को दर्शाता है।
हालिया नियुक्तियों का संदर्भ
सरकार पिछले कुछ समय से बोर्ड को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। बीते हफ्ते ही सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन एस सोमनाथ को इस बोर्ड में शामिल किया था। उनके साथ ही महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को भी आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड में जगह दी गई थी। इस तरह की नियुक्तियों का उद्देश्य बोर्ड में उद्योग, तकनीक, कूटनीति और वित्त जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाना है और ऐसी विविध हस्तियों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि बोर्ड आधुनिक अर्थव्यवस्था की बहुआयामी चुनौतियों का सामना कर सके।
सेंट्रल बोर्ड की भूमिका और महत्व
आरबीआई का सेंट्रल बोर्ड केंद्रीय बैंक के कामकाज की देखरेख करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन नए सदस्यों के जुड़ने से मौद्रिक, वित्तीय और आर्थिक नीतियों के निर्धारण में व्यापक मदद मिलने की उम्मीद है और विशेषज्ञों की यह टीम देश की आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगी। कूटनीति, अर्थशास्त्र और सार्वजनिक वित्त के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर, बोर्ड आरबीआई को मूल्य स्थिरता बनाए रखने और उत्पादक क्षेत्रों में ऋण के प्रवाह को सुनिश्चित करने के अपने मिशन में बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्षम होगा।
