गीतू मोहनदास द्वारा निर्देशित फिल्म टॉक्सिक इन दिनों अपनी कहानी और किरदारों के चित्रण को लेकर गहरे विवादों में घिर गई है। फिल्म पर आरोप लग रहे हैं कि यह एक मर्दवादी सोच को बढ़ावा देने वाली फिल्म है, जिसमें महिला किरदारों को केवल नाम के लिए रखा गया है। इस फिल्म में कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, रुक्मणी बसंत और तारा सुतारिया जैसी 5 दिग्गज हीरोइनें शामिल हैं, लेकिन दर्शकों और समीक्षकों का मानना है कि यश के किरदार को बड़ा दिखाने के चक्कर में इन सभी को हाशिए पर धकेल दिया गया है। यश न केवल इस फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं, बल्कि वह इसके निर्माता भी हैं और उन्होंने गीतू मोहनदास के साथ मिलकर इसकी पटकथा भी लिखी है।
यश का वर्चस्व और महिला किरदारों की अनदेखी
टॉक्सिक फिल्म की पूरी संरचना यश की रॉकिंग स्टार वाली छवि को केंद्र में रखकर तैयार की गई है और फिल्म पर केवल दर्शकों को परेशान करने के ही आरोप नहीं लगे हैं, बल्कि इसकी पितृसत्तात्मक सोच भी आलोचना के घेरे में है। फिल्म में यश का किरदार राया, गोवा के अंडरवर्ल्ड पर अपना कब्जा जमाता है। उसके गले पर बना टैटू, होठों में दबा सिगार और हाथ में शराब का गिलास उसके स्वैग के रूप में दिखाया गया है, लेकिन इसी स्वैग के नीचे पूरी कहानी दबकर रह जाती है। राया का किरदार महिला किरदारों पर धौंस दिखाता है और अपने गुस्से के आगे किसी भी महिला की संवेदनाओं की परवाह नहीं करता है।
हैरानी की बात यह है कि फिल्म की निर्देशक गीतू मोहनदास खुद एक महिला हैं, फिर भी कहानी में महिला किरदारों को उचित विस्तार नहीं मिल पाया है और उनका इस्तेमाल केवल संवेदना जगाने या सौंदर्य प्रदर्शन के लिए किया गया है। फिल्म में 5 हीरोइनें होने के बावजूद, वे सभी राया के हिंसक व्यक्तित्व के सामने बहुत कमजोर और सताई हुई नजर आती हैं। इनमें से कई किरदारों का फिल्म में असमय अंत हो जाता है, जिससे शुरुआत से लेकर क्लाइमेक्स तक केवल यश ही पर्दे पर छाए रहते हैं।
हर दृश्य में यश और रॉकिंग स्टार इमेज
फिल्म की स्टारकास्ट में यश के नाम के साथ रॉकिंग स्टार जोड़ा गया है, जिससे साफ पता चलता है कि टॉक्सिक को इसी सोच के साथ बनाया गया है कि हर सीन में यश को पूरी तरह फैलने का मौका मिले। यश ने बाप और बेटे, दोनों ही भूमिकाओं में अपने अभिनय की छाप छोड़ी है, लेकिन इसकी कीमत फिल्म की हीरोइनों को चुकानी पड़ी है। कियारा आडवाणी, नयनतारा, तारा सुतारिया, रुक्मणी बसंत और हुमा कुरैशी के किरदार केवल हीरो के इर्द-गिर्द घूमने वाले बनकर रह गए हैं। ये महिलाएं अपने अस्तित्व को आकार देने में सफल नहीं हो पातीं और उनकी ख्वाहिशें राया के विकास की भेंट चढ़ जाती हैं।
संवादों में झलकता मर्दवाद और क्रूरता
फिल्म के संवादों को लेकर भी काफी आपत्ति जताई जा रही है। राया द्वारा बोला गया एक संवाद, “लोग एक-दूसरे से लड़कर ऊपर जाते हैं, हम एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर जाएंगे,” पूरी तरह से मर्दवादी और महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझने वाला माना जा रहा है। राया का किरदार एक ऐसे व्यक्ति का है जिसे नैतिकता से एलर्जी है और जिसके लिए बदला लेने की कोई निश्चित दिशा नहीं है। उसके माता-पिता का इतिहास भी अपराध से जुड़ा था, जहां उसकी मां ने उसके पिता की नृशंस हत्या की थी। इसी खून-खराबे के बीच बड़ा होकर राया एक खूंखार अपराधी बन जाता है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों की हत्याएं समान क्रूरता से करता है।
कियारा और नयनतारा के किरदारों का दुखद अंत
कियारा आडवाणी ने फिल्म में नाडिया नाम की एक सर्कस कलाकार की भूमिका निभाई है। ” यह संवाद उसके भीतर के प्रेम को दर्शाता है, लेकिन राया का दिल नहीं पिघलता। वह गोवा का सबसे बड़ा गैंगस्टर बनने की चाह में पुर्तगाली गैंगस्टरों को खत्म करना चाहता है। जब राया नहीं बदलता, तो नाडिया एक विस्फोट में अपनी जान दे देती है। इस तरह कियारा का प्रभावशाली किरदार बीच में ही खत्म हो जाता है।
यही स्थिति नयनतारा के किरदार गंगा के साथ भी होती है। गंगा, राया की बड़ी बहन है जिसने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया और उसे गोवा पर राज करने का रास्ता दिखाया और लेकिन सल्वाडोर के गैंग की एलिजाबेथ (हुमा कुरैशी) के कहने पर नाडिया द्वारा गंगा की हत्या कर दी जाती है। फिल्म में “महिला ही महिला की दुश्मन” जैसे संवादों का भी इस्तेमाल किया गया है और नयनतारा जैसी बड़ी अभिनेत्री का किरदार भी फिल्म में पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है।
तारा सुतारिया और अन्य किरदारों की स्थिति
तारा सुतारिया ने गैंगस्टर सल्वाडोर की बेटी रेबेका का रोल किया है, जो राया से प्यार करती है। नाडिया के साथ संबंध होने के बावजूद राया रेबेका के साथ भी अनैतिक रिश्ते रखता है। अंततः एक गोलीबारी में रेबेका की भी मौत हो जाती है। हुमा कुरैशी एक नकारात्मक भूमिका में हैं, जो साजिशों और कैसीनो की दुनिया का हिस्सा हैं और अंत में खुद भी इसका शिकार बनती हैं। रुक्मणी बसंत ने राया की दूसरी पत्नी मेलिसा का किरदार निभाया है, जो राया के खूंखार रूप से हमेशा डरी रहती है और अपने बेटे एडम को उससे दूर रखना चाहती है। फिल्म का एक संवाद, “काल्पनिक वफादारी वास्तविक विश्वासघात से कहीं अधिक पवित्र होती है,” पूरी फिल्म के धोखे और फरेब को बयां करता है, जिसका शिकार अंततः सभी महिला किरदार होते हैं।
