आरबीआई ने 11 लाख करोड़ का सोना बेचने की खबरों को नकारा

भारतीय रिजर्व बैंक ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि उसने रुपये को सहारा देने के लिए सोना बेचा है। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि उसके सोने के भंडार में कमी के बजाय वृद्धि हुई है और वर्तमान में यह 880.52 टन पर स्थिर है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें यह दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने भारतीय रुपये को मजबूती देने के लिए अपने सोने के भंडार का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया है। 52 टन पर पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद आया है जिनमें यह दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है।

भ्रामक खबरों का खंडन

आरबीआई ने अपने आधिकारिक बयान में जोर देकर कहा कि ये खबरें पूरी तरह से निराधार और गलत हैं। बैंक ने आम जनता को यह सलाह दी है कि वे इस तरह के संवेदनशील मामलों में केवल आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी इन खबरों पर एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट जारी की है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी में वास्तव में वृद्धि देखी गई है। 85 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया

आरबीआई की ओर से यह तीखी प्रतिक्रिया ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद आई है। उस रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के डेटा का हवाला देते हुए कहा गया था कि भारत के सेंट्रल बैंक ने मिडिल ईस्ट में युद्ध के साइड इफेक्ट से अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों को बचाने के लिए अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बेचा हो सकता है और 5 अरब डॉलर की फॉरेन करेंसी असेट्स की खरीदारी की गई। रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि यह गिरावट इस कीमती धातु पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद आई, जिससे बैंक के सोने और डॉलर का मूल्य बढ़ना चाहिए था।

रिपोर्ट के अन्य दावे

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि कथित बिक्री उन चिंताओं को उजागर करती है जिनका सामना भारत लगातार कैपिटल आउटफ्लो और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि आरबीआई लिक्विड फॉरेक्स को प्राथमिकता दे रहा है, जिसकी बड़ी वजह चालू खाता घाटे के कारण रुपये पर लगातार बढ़ता दबाव है। 52 मीट्रिक टन सोना था, जिसमें से 77 प्रतिशत देश के भीतर ही रखा गया था। छह महीने पहले तक बैंक ने अपने सोने का केवल 66 प्रतिशत हिस्सा ही भारत में रखा था।

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के तथ्य

आरबीआई ने अप्रैल में अपनी छमाही फॉरेक्स रिपोर्ट में बताया था कि उसका अधिकांश विदेशी भंडार बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास सुरक्षित है। 58 मीट्रिक टन था। 94 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है। 20 मीट्रिक टन सोना बैंकिंग डिपार्टमेंट के तहत रखा गया था।