IND vs SA 2nd Test / शुभमन गिल के बाहर होने पर ऋषभ पंत संभालेंगे कप्तानी, गुवाहाटी टेस्ट में इतिहास रचने का मौका

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दूसरे टेस्ट में शुभमन गिल की गर्दन की चोट के कारण ऋषभ पंत कप्तानी कर सकते हैं। यह टेस्ट में उनकी पहली कप्तानी होगी, जिससे वह एमएस धोनी के बाद दूसरे विकेटकीपर-बल्लेबाज कप्तान बन जाएंगे। भारत सीरीज बराबर करने की कोशिश करेगा।

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली जा रही दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा और निर्णायक मुकाबला 22 नवंबर से गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीरीज का पहला मुकाबला अफ्रीकी टीम ने तीन दिनों के भीतर 30 रनों से जीतकर 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। ऐसे में, टीम इंडिया की नजरें इस मुकाबले को जीतकर सीरीज को बराबरी पर समाप्त करने पर टिकी होंगी, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

शुभमन गिल की चोट और कप्तानी का संकट

इस महत्वपूर्ण मुकाबले से पहले भारतीय टीम को एक बड़ा झटका लगा है। टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल कोलकाता टेस्ट मैच के दौरान गर्दन में खिंचाव की समस्या के कारण मुकाबले के बीच से ही बाहर हो गए थे। उनकी यह चोट इतनी गंभीर है कि उनके गुवाहाटी टेस्ट में खेलने की उम्मीद ना के बराबर है। गिल की अनुपस्थिति में, टीम इंडिया के लिए कप्तानी की जिम्मेदारी स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत संभालते हुए दिख सकते हैं और यह स्थिति टीम प्रबंधन के लिए एक अप्रत्याशित बदलाव है, लेकिन पंत जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए यह एक बड़ा अवसर भी है। गिल की फिटनेस को लेकर अंतिम फैसला 21 नवंबर की शाम को होने वाले उनके फिटनेस टेस्ट। के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा संकेत उनके खेलने की संभावना को कम ही दर्शाते हैं।

ऋषभ पंत: टेस्ट कप्तानी में नई पारी

ऋषभ पंत की गिनती मौजूदा समय में विश्व क्रिकेट के सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाजों में की जाती है। टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन अब तक काफी शानदार रहा है, जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। यदि गुवाहाटी टेस्ट मैच में ऋषभ पंत टीम इंडिया की कप्तानी संभालते हैं, तो यह पहली बार होगा जब वह इस फॉर्मेट में भारतीय टीम का नेतृत्व करेंगे। यह उनके करियर का एक नया अध्याय होगा और उन्हें अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा। उनकी आक्रामक शैली और खेल की गहरी समझ टीम को एक नई ऊर्जा प्रदान। कर सकती है, खासकर ऐसे महत्वपूर्ण मुकाबले में जहां सीरीज दांव पर लगी है।

पंत का कप्तानी अनुभव: टी20 और फर्स्ट क्लास

हालांकि ऋषभ पंत ने टेस्ट क्रिकेट में पहले कभी कप्तानी नहीं की है, लेकिन उनके पास अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में कप्तानी का अनुभव मौजूद है और पंत ने अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया की कप्तानी की जिम्मेदारी 5 मुकाबलों में संभाली है, जिसमें सभी टी20 मुकाबले थे। इन 5 टी20 मैचों में से पंत की कप्तानी में भारतीय टीम ने 2 मैचों। में जीत हासिल की है, जबकि 2 मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, एक मैच रद्द रहा था। अंतरराष्ट्रीय टी20 के अलावा, पंत ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी कप्तानी की है। उन्होंने साल 2017-18 के रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान दिल्ली टीम की 5 मैचों में कप्तानी की थी। इन 5 फर्स्ट क्लास मैचों में दिल्ली को 2 मैचों में जीत मिली थी, जबकि। 1 में हार का सामना करना पड़ा था और 2 मुकाबले ड्रॉ पर समाप्त हुए थे। यह अनुभव उन्हें टेस्ट क्रिकेट की लंबी अवधि की कप्तानी के लिए तैयार करने में सहायक हो सकता है।

धोनी के बाद दूसरे विकेटकीपर कप्तान

यदि ऋषभ पंत गुवाहाटी टेस्ट मैच में टीम इंडिया की कप्तानी संभालते हैं, तो वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेंगे। अभी तक टेस्ट फॉर्मेट में विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर भारतीय टीम की कप्तानी सिर्फ एमएस धोनी ने संभाली है। ऐसे में, पंत भारतीय क्रिकेट में अब तक के सिर्फ दूसरे ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज बन जाएंगे, जिनको टेस्ट में कप्तानी करने का मौका मिला है। यह एक दुर्लभ सम्मान है, जो उनकी क्षमता और टीम में उनके महत्व को दर्शाता है। धोनी के बाद इस विशिष्ट क्लब में शामिल होना पंत के लिए एक बड़ी प्रेरणा होगी और यह भारतीय क्रिकेट में विकेटकीपर-कप्तानों की विरासत को आगे बढ़ाएगा।

गुवाहाटी टेस्ट की चुनौतियां और उम्मीदें

गुवाहाटी टेस्ट मैच भारतीय टीम के लिए न केवल सीरीज को बचाने का मौका है, बल्कि यह ऋषभ पंत के लिए भी अपनी कप्तानी की छाप छोड़ने का एक बड़ा मंच है। टीम को पहले टेस्ट में मिली हार से उबरकर एक मजबूत वापसी करनी होगी। शुभमन गिल की अनुपस्थिति में बल्लेबाजी क्रम में भी कुछ बदलाव देखने। को मिल सकते हैं, जिससे अन्य खिलाड़ियों पर प्रदर्शन का अतिरिक्त दबाव होगा। पंत की कप्तानी में टीम को एकजुट होकर खेलना होगा और साउथ अफ्रीकी टीम के खिलाफ अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक अंजाम देना होगा। यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक हो सकता है, खासकर यदि। पंत अपनी कप्तानी में टीम को जीत दिलाकर सीरीज बराबर करने में सफल रहते हैं।

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