देश / पेट्रोल की बढ़ती रेट्स, पीएम नरेंद्र मोदी ने कीमतों को कम करने के लिए दिया सूत्र

Zoom News : Feb 18, 2021, 07:31 AM
नई दिल्ली। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत ने सऊदी अरब (सऊदी अरब) और अन्य तेल उत्पादक देशों (ओपेक) को कच्चे तेल उत्पादन में कटौती के स्तर को कम करने के लिए कहा है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के कारण आर्थिक सुधार और मांग में कमी है। इसी समय, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अगर पहले की सरकारों ने आयात पर देश की निर्भरता को कम करने की दिशा में काम किया था, तो आज आम लोगों पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अगले कुछ महीनों के लिए तेल की कीमतों के बजाय बढ़ती मांग पर जोर देना चाहिए। वास्तव में, सऊदी अरब ने फरवरी और मार्च 2021 के दौरान तेल उत्पादन में प्रति दिन एक मिलियन बैरल की कमी की घोषणा की। तब से, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सऊदी अरब ने यह कदम तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और संबद्ध देशों (ओपेक प्लस) के साथ रूस सहित समझौते के तहत उठाया। तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, एक साल में उच्चतम स्तर। इसके साथ, भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमत 100 रुपये लीटर से अधिक हो गई है।

प्रधान ने ऊर्जा परिदृश्य पर 11 वें आईईए आईईएफ संगोष्ठी में कहा कि पहले से ही गिरती मांग कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से बढ़ी थी। इसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की वसूली प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने कई मोर्चों पर महंगाई पर काबू पा लिया है, लेकिन सरकार कच्चे तेल की वजह से महंगाई पर कुछ नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से मूल्य संवेदनशील भारतीय ग्राहक प्रभावित हैं। यह मांग वृद्धि को भी प्रभावित कर रहा है। यह न केवल भारत में बल्कि अन्य विकासशील देशों में आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में देश का 85 प्रतिशत तेल आयात किया गया था। वहीं, गैस का केवल 53 प्रतिशत आयात किया गया था। अगर इस आयात को कम करने के लिए पहले प्रयास किया गया होता, तो आज आम आदमी पर बोझ नहीं होता। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार मध्य वर्ग को लेकर संवेदनशील है। इसीलिए पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। बता दें कि गन्ने से इथेनॉल मिलता है। इससे तेल आयात में कटौती होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ऊर्जा आयात निर्भरता को कम करने पर काम कर रही है। इसके अलावा अक्षय ऊर्जा पर भी काम चल रहा है। अक्षय ऊर्जा 2030 तक देश में कुल ऊर्जा उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होगी।

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