ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना के करीमनगर में एक चुनावी जनसभा के दौरान भारतीय संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि देश का संविधान 'हम भारत के लोग' (We the People) के शब्दों से शुरू होता है, न कि 'भारत माता' के नाम से। उन्होंने तर्क दिया कि यदि देशभक्ति को केवल एक धर्म या धार्मिक नारों से जोड़ा जाता है, तो यह संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध होगा।
संवैधानिक प्रस्तावना और धार्मिक स्वतंत्रता
ओवैसी ने अपने संबोधन में 24 जनवरी, 1950 की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया जब संविधान को अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ओवैसी के अनुसार, संविधान की प्रस्तावना स्वतंत्रता, समानता, न्याय और भाईचारे की नींव पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी विशेष धार्मिक पहचान को देशभक्ति का एकमात्र पैमाना बनाना उन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान होगा जिन्होंने एक धर्मनिरपेक्ष भारत का सपना देखा था।
ऐतिहासिक संदर्भ: बहादुर शाह ज़फ़र और यूसुफ मेहरअली
इतिहास का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि यदि धर्म ही देशभक्ति का आधार है, तो बहादुर शाह ज़फ़र जैसे नायकों के योगदान को कैसे देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि बहादुर शाह ज़फ़र ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी और उनके अवशेष आज भी रंगून में हैं। इसके साथ ही उन्होंने यूसुफ मेहरअली का नाम लिया, जिन्होंने 'भारत छोड़ो' (Quit India) और 'साइमन वापस जाओ' (Simon Go Back) जैसे प्रसिद्ध नारे दिए थे और ओवैसी ने कहा कि इन महापुरुषों के योगदान को किसी एक धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता।
रूसी तेल आयात और आर्थिक संप्रभुता पर सवाल
आर्थिक मोर्चे पर ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रवाद पर प्रहार किया। उन्होंने रूस से कच्चे तेल की खरीद में आई कमी और अमेरिका द्वारा दी गई चेतावनियों का जिक्र किया। ओवैसी ने दावा किया कि जब अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर 25% एड वैलोरम ड्यूटी लगाने की धमकी दी, तो केंद्र सरकार की चुप्पी चिंताजनक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने रूस से तेल आयात कम कर दिया है, जबकि चीन ने सस्ते कच्चे तेल का लाभ उठाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
करीमनगर की स्थानीय समस्याएं और राजनीतिक समीकरण
स्थानीय मुद्दों पर बात करते हुए ओवैसी ने करीमनगर को 'स्मार्ट सिटी' की सूची में होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं से वंचित बताया। उन्होंने सड़कों, जल निकासी और बिजली की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त की। ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम बहुल इलाकों की जानबूझकर उपेक्षा की गई है और स्थानीय प्रशासन ने बिना उचित प्रक्रिया के कई घर गिरा दिए हैं। उन्होंने मतदाताओं को आगाह किया कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) को दिया गया वोट अंततः BJP को लाभ पहुंचा सकता है, क्योंकि चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ओवैसी का यह बयान आगामी नगर निगम चुनावों से पहले मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने की एक रणनीति है और संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 25 का संदर्भ देकर उन्होंने अपनी पार्टी की विचारधारा को संवैधानिक ढांचे के भीतर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आयात जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने स्थानीय राजनीति को राष्ट्रीय और वैश्विक संदर्भों से जोड़ने की कोशिश की है।
