भारत के दांव से बचने के लिए बांग्लादेश ने निकाला रास्ता, दुनिया की दो आर्थिक शक्तियों से कर ली डील

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अमेरिका और जापान के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कपड़ा निर्यात से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा का सामना करना और देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया है। ढाका ने दुनिया की दो प्रमुख आर्थिक शक्तियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के साथ रणनीतिक व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है। इन समझौतों का प्राथमिक उद्देश्य बांग्लादेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करना और विशेष रूप से इसके कपड़ा (गारमेंट) उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ अपने कपड़ा निर्यात पर टैरिफ कम करने में सफलता हासिल की है, जिससे बांग्लादेशी निर्यातकों के लिए चिंताएं बढ़ गई थीं।

जापान के साथ ऐतिहासिक आर्थिक साझेदारी समझौता

पिछले सप्ताह बांग्लादेश ने जापान के साथ एक आर्थिक साझेदारी समझौते (EPA) पर हस्ताक्षर किए। यह बांग्लादेश के इतिहास में किसी भी देश के साथ किया गया पहला पूर्ण आर्थिक साझेदारी समझौता है। 9% टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस प्रदान करेगा। इसमें रेडीमेड गारमेंट्स भी शामिल हैं, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य जापानी निवेशकों को बांग्लादेश के ऑटोमोटिव और विनिर्माण क्षेत्रों में आकर्षित करना है। बांग्लादेश सरकार का लक्ष्य जापानी उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर वाहन निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे देश के औद्योगिक ढांचे में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अमेरिका के साथ रेसिप्रोकल टैरिफ में बड़ी कटौती

जापान के बाद बांग्लादेश अब सोमवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। इस प्रस्तावित समझौते के तहत, अमेरिका उन गारमेंट उत्पादों पर टैरिफ नहीं लगाएगा जो अमेरिकी कच्चे माल, जैसे कि अमेरिकी कपास और धागे से बने होंगे और वर्तमान में बांग्लादेश के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में लगभग 95% हिस्सा कपड़ों का है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी उत्पाद में 70% अमेरिकी सामग्री का उपयोग किया गया है, तो उस पर लगने वाले 20% रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट दी जाएगी। यह समझौता बांग्लादेशी निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद करेगा, विशेषकर तब जब भारत को अमेरिकी बाजार में टैरिफ लाभ प्राप्त हुआ है।

एलडीसी श्रेणी से बाहर निकलने की रणनीतिक तैयारी

बांग्लादेश नवंबर में 'सबसे कम विकसित देश' (LDC) की श्रेणी से बाहर आने वाला है। इस बदलाव के बाद बांग्लादेश को मिलने वाले कई अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लाभ समाप्त हो जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए यूनुस सरकार ने समय से पहले इन समझौतों को मंजूरी दी है। जापान के साथ EPA और अमेरिका के साथ व्यापारिक तालमेल इसी रणनीति का हिस्सा है ताकि एलडीसी दर्जे से हटने के बाद भी निर्यात पर बुरा असर न पड़े। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ व्यापार घाटे को कम करने के लिए बोइंग विमान, सोयाबीन और भारी मात्रा में कपास खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। 5 मिलियन टन गेहूं आयात करने का समझौता भी किया गया है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और राजनीतिक प्रभाव

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन समझौतों का भविष्य बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगा। हालांकि यूनुस सरकार को अमेरिका का मजबूत समर्थन प्राप्त है, लेकिन चुनाव के बाद आने वाली नई सरकार की नीतियां इन समझौतों के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा बांग्लादेशी उत्पादों पर टैरिफ को 37% से घटाकर 20% करना और अब कच्चे माल के आधार पर और छूट देना, ढाका के लिए एक बड़ी राहत है। यह न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि रोजगार के अवसरों को भी सुरक्षित रखेगा। भारत के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में, ये सौदे बांग्लादेश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास हैं।

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