सहारनपुर में कलेक्ट्रेट मस्जिद पर चला बुलडोजर, इमरान मसूद ने बताया काला दिन

सहारनपुर प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद को अवैध बताकर गिरा दिया है। इस कार्रवाई पर अखिलेश यादव ने सौहार्द बनाए रखने की सलाह दी है, जबकि इमरान मसूद ने इसे संविधान पर हमला बताते हुए विरोध का आह्वान किया है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में प्रशासन द्वारा एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसमें कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर स्थित एक मस्जिद को अवैध करार देते हुए जमींदोज कर दिया गया। इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद से पूरे प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने इस कदम की तीखी आलोचना की है और इसे सरकार की दमनकारी नीति का हिस्सा बताया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है।

अखिलेश यादव और इमरान मसूद की तीखी प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी सरकार के लिए सौहार्द बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। उनके इस बयान को प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने शांति और भाईचारे को प्राथमिकता देने की बात कही है।

वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे सहारनपुर के लिए एक काला दिन करार दिया और आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर भारत के संविधान पर हमला है। मसूद ने दावा किया कि जिस मस्जिद को गिराया गया है, वह 1911 से भी पहले की है और इसका ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अभी 22 दिन का समय शेष था, लेकिन प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर रातों-रात इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

इमरान मसूद ने अपने बयान में कहा, "संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं। यह मस्जिद 1911 से पहले की है। अभी 22 दिन और बचे थे, लेकिन रातों-रात चारों तरफ से घेराबंदी कर दी गई। देश के संविधान पर हथौड़ा चलाया जा रहा है। यह न समझें कि मस्जिद को शहीद करके बहुत बड़ा काम कर दिया गया है। आज यह हमारे साथ हो रहा है, कल किसी और के साथ होगा। इससे कोई भी हिंदू खुश नहीं होगा।

स्वामित्व और कानूनी खामियों पर उठाए सवाल

सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद के मालिकाना हक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में आज भी इस मस्जिद का मालिकाना हक वाहिद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाई कोर्ट में तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि वक्फ बोर्ड को इस मामले में न तो पक्षकार बनाया गया और न ही किसी भी स्तर पर कार्यवाही में शामिल किया गया। मसूद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और लोगों को उनके घरों में कैद करके इस मस्जिद को गिराया। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इस अन्याय के खिलाफ काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएं।

प्रशासनिक आदेश और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

मस्जिद को गिराने की यह कार्रवाई एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुई। प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने ही इस मस्जिद को अवैध घोषित किया था और इसे हटाने का आदेश दिया था। इसी अदालती आदेश के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है।

कार्रवाई के दौरान और उसके बाद किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे सहारनपुर जिले में हाई अलर्ट जारी किया गया है। संवेदनशील इलाकों में पीएसी (PAC) और आरआरएफ (RRF) की भारी तैनाती की गई है। दमकल विभाग की गाड़ियों को भी अलग-अलग स्थानों पर अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह की भीड़ या तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि जिले में शांति व्यवस्था कायम रहे और किसी भी प्रकार की अफवाह को फैलने से रोका जा सके।