शारदीय नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के लिए 11 अक्टूबर को मिल रहे दो शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। घटस्थापना के लिए सुबह 6:00 से 10:00 बजे और दोपहर 11:45 से 12:30 बजे तक के दो श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ होता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होने जा रही है। नवरात्रि के पहले दिन घर-घर में घटस्थापना की जाती है और मां दुर्गा का श्रद्धापूर्वक आह्वान किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर कलश स्थापित करने से ही पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि पहले दिन देवी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा रहेगा, तो बता दें कि कलश स्थापना के लिए दिन में दो सबसे शुभ मुहूर्त उपलब्ध हो रहे हैं। सही समय और विधि से किया गया पूजन घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

प्रातः काल का सबसे उत्तम मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना करने के लिए सूर्योदय के तुरंत बाद का समय आध्यात्मिक दृष्टि से सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह के समय वातावरण में सात्विकता, शुद्धता और शांति का वास होता है, जो देवी पूजन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है और 11 अक्टूबर 2026 के दिन सुबह लगभग सवेरे 6:00 से सवेरे 10:00 के मध्य घटस्थापना के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इस समय अवधि में पूजा की समस्त तैयारी करके कलश स्थापित करना बहुत शुभ फल प्रदान करता है। जो लोग अपने घर में सुख और समृद्धि की कामना करते हैं, उन्हें इस प्रातःकाल के शुभ समय में ही मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश की स्थापना संपन्न कर लेनी चाहिए।

दोपहर का अभिजित मुहूर्त और सावधानियां

यदि किसी अनिवार्य कारणवश आप सुबह के समय कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए दोपहर में अभिजित मुहूर्त के रूप में दूसरा सबसे शुभ समय प्राप्त होता है और दोपहर के समय अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापित करना अत्यंत शुभ और अचूक फलदायी माना गया है। यह समय सामान्यतः दोपहर 11:45 से 12:30 के बीच रहने वाला है। इस समय में भी आप पूरे विधि-विधान के साथ घटस्थापना का कार्य कर सकते हैं। इसके साथ ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि कलश स्थापना हमेशा शुभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। राहुकाल के समय घटस्थापना करना शास्त्रों में पूरी तरह वर्जित माना गया है, इसलिए राहुकाल के समय से बचकर ही पूजन कार्य संपन्न करें।

कलश स्थापना की संपूर्ण विधि और नियम

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा या अपने नियमित पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। वहां गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। इसके बाद पूजा स्थान पर साफ मिट्टी बिछाएं या लकड़ी की एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर जौ यानी सप्तधान्य बोएं। कलश की तैयारी के लिए तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश का उपयोग करें। कलश पर सिंदूर से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और उसके गले में कलावा बांधें और कलश के भीतर शुद्ध जल, थोड़ा गंगाजल, दूर्वा, अक्षत, एक साबुत सुपारी और एक सिक्का डालें।

इसके पश्चात कलश के मुख पर 5 या 7 आम के अथवा अशोक के पत्ते इस प्रकार रखें कि उनका कुछ हिस्सा बाहर की ओर दिखाई दे। एक सूखे नारियल को लें और उस पर लाल कपड़ा या चुनरी लपेटकर उसे कलावे से अच्छी तरह बांध लें। फिर उस नारियल को आम के पत्तों के बीचों-बीच कलश के ऊपर स्थापित करें। ध्यान रहे कि नारियल का मुख हमेशा आपकी ओर होना चाहिए। अंत में कलश को मिट्टी की वेदी के बीच में स्थापित कर दें। इसके बाद हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर मां दुर्गा और सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें तथा अखंड दीपक प्रज्वलित करें। इस प्रकार विधिपूर्वक की गई स्थापना से नौ दिनों की पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है।