अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रति कड़े रुख और धमकियों के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी अस्थिरता देखी गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी शुरुआती बढ़त खोकर लाल निशान पर आ गए। इस गिरावट के मुख्य कारणों में कच्चे तेल की कीमतों का $110 प्रति बैरल के स्तर को पार करना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली शामिल है। 72 lakh crore की कमी आई है।
बाजार सूचकांकों की वर्तमान स्थिति
75 अंकों के उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, वैश्विक संकेतों और ईरान-अमेरिका तनाव की खबरों के बाद बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। 66 अंकों के निचले स्तर को छू गया। 95 अंकों के निचले स्तर पर आ गया। बाजार में गिरावट का यह सिलसिला मुख्य रूप से ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र के बड़े शेयरों में बिकवाली के कारण देखा गया।
प्रमुख शेयरों और सेक्टोरल इंडेक्स का प्रदर्शन
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इंडिगो (IndiGo), कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स और आईसीआईसीआई बैंक में 1% से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। विमानन क्षेत्र की कंपनी इंडिगो के शेयरों में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को माना जा रहा है, जो एयरलाइन के परिचालन खर्च को बढ़ाता है। दूसरी ओर, आईटी क्षेत्र की कंपनियों जैसे इंफोसिस और टेक महिंद्रा के शेयरों में 1% से 4% की बढ़त देखी गई। 3% से अधिक की गिरावट आई, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1% की वृद्धि दर्ज की गई। एनएसई पर कुल 1,702 शेयरों में गिरावट और 1,036 शेयरों में बढ़त देखी गई।
ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए नहीं खोलता है, तो अमेरिका अपने हमले तेज कर देगा और ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के लिए 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' होने की बात कही। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है और इस जलमार्ग के बंद होने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ईरान को लेकर बढ़ती धमकियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। 5 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। मार्च में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों के बाद यह पहली बार है जब तेल की कीमतें $100 के स्तर को पार कर $110 के ऊपर स्थिर हुई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।
रुपया और विदेशी निवेशकों की गतिविधि
1% की बढ़त के साथ 93 पर खुला। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में रुपए की गिरावट को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें बैंकों को 'रुपया नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स' (NDF) बेचने से रोकना शामिल है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई लगातार 23वें सत्र में शुद्ध विक्रेता रहे और पिछले कारोबारी सत्र में उन्होंने लगभग ₹9,931 crore के शेयर बेचे। 65% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
