भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 30 मार्च को लगातार दूसरे सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस बिकवाली के दबाव के कारण सेंसेक्स 26 महीने में पहली बार 72,000 अंकों के स्तर से नीचे बंद हुआ। 43 लाख करोड़ की कमी आई है। 5% की गिरावट आई है, जो मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद से उनका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन है। 3 बिलियन की रिकॉर्ड मासिक विदेशी पूंजी निकासी और भू-राजनीतिक तनाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।
बाजार के प्रमुख आंकड़े और गिरावट का स्तर
55 पर बंद हुआ। 40 के स्तर पर रहा। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3,419 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 837 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। 138 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह 14 फरवरी 2024 के बाद पहली बार है जब सेंसेक्स ने 72,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ा है। वित्त वर्ष 2026 के समापन से पहले यह गिरावट भारतीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जो वित्त वर्ष 2020 के बाद के सबसे खराब प्रदर्शन की ओर इशारा कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आशंका ने वैश्विक और घरेलू बाजारों को प्रभावित किया है। अमेरिकी सैन्य तैनाती और ईरान की ओर से दी गई चेतावनियों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 3% उछलकर $115 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $101 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है, तो तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा।
आरबीआई के निर्देश और बैंकिंग शेयरों पर प्रभाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकों को दिए गए हालिया निर्देश के बाद बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी नेट ओपन रुपया पोजीशन को हर कारोबारी दिन के अंत तक $100 मिलियन तक सीमित रखें। इस नियम का पालन 10 अप्रैल तक अनिवार्य किया गया है। इस कदम का उद्देश्य ऑनशोर और एनडीएफ (NDF) बाजार के बीच आर्बिट्रेज ट्रेड को नियंत्रित करना है। हालांकि इस निर्णय से रुपये को शुरुआती सत्र में कुछ राहत मिली, लेकिन बैंकिंग शेयरों में गिरावट ने बेंचमार्क इंडेक्स पर नकारात्मक दबाव डाला।
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और विदेशी निवेशकों की निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार पूंजी निकालने का सिलसिला जारी है। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई लगातार 20वें सत्र में शुद्ध विक्रेता बने रहे। पिछले सत्र में उन्होंने लगभग ₹4,367 करोड़ के शेयर बेचे। इस निरंतर निकासी और कच्चे तेल की उच्च कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 95 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। हालांकि वित्त मंत्रालय ने अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपये की स्थिति को स्थिर बताया है, लेकिन चालू खाता घाटे (CAD) और व्यापार घाटे की चिंताओं ने बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।
वैश्विक बाजारों का रुख और मासिक एक्सपायरी
भारतीय बाजारों में गिरावट वैश्विक रुझानों के अनुरूप रही। जापान का निक्केई 3% से अधिक गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और ताइवान वेटेड इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी बाजारों में एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी पिछले सत्र के दौरान भारी गिरावट देखी गई थी। घरेलू स्तर पर, निफ्टी के फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) अनुबंधों की मासिक एक्सपायरी के कारण बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। महावीर जयंती के अवसर पर बाजार अवकाश से पहले ट्रेडर्स द्वारा अपनी पोजीशन को एडजस्ट करने के कारण बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
