शेयर बाजार में गिरावट: 7 दिग्गज कंपनियों के ₹1.75 लाख करोड़ डूबे।

बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे शीर्ष 10 में से सात कंपनियों का बाजार पूंजीकरण ₹1.75 लाख करोड़ घट गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज को सर्वाधिक नुकसान हुआ, जबकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.27% की गिरावट आई। वैश्विक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताओं को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है।

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। 75 लाख करोड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज और प्रमुख बैंकिंग संस्थानों पर पड़ा है। 27% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को जिम्मेदार माना जा रहा है। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं और रुपये की कमजोरी ने बाजार के सेंटिमेंट को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। सप्ताह के दौरान बाजार ने कुछ मौकों पर वापसी की कोशिश की, लेकिन शुक्रवार को हुई भारी बिकवाली ने पिछले सभी लाभों को समाप्त कर दिया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज और बैंकिंग क्षेत्र को हुआ सर्वाधिक नुकसान

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस सप्ताह सबसे तगड़ा झटका लगा है और 62 करोड़ पर आ गया। यह गिरावट कंपनी के शेयरों में हुई निरंतर बिकवाली का परिणाम है। 59 करोड़ की कमी आई।

42 करोड़ कम हो गई। 76 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख वित्तीय संस्थानों के मूल्यांकन में आई कमी ने बैंकिंग इंडेक्स पर भारी दबाव डाला, जिससे समग्र बाजार की स्थिति कमजोर हुई।

वैश्विक तनाव और आर्थिक कारकों का बाजार पर प्रभाव

बाजार के जानकारों के अनुसार, मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है और घरेलू मोर्चे पर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई बिकवाली और भारतीय रुपये की विनिमय दर में आई गिरावट ने भी बाजार पर दबाव बनाया।

सप्ताह के दौरान आईटी और एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और भारती एयरटेल के बाजार पूंजीकरण में भी कमी देखी गई। हालांकि, इन कंपनियों के नुकसान का स्तर रिलायंस और बैंकिंग शेयरों की तुलना में कम रहा, लेकिन सामूहिक रूप से इन्होंने बाजार के कुल पूंजीकरण को नीचे धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विपरीत परिस्थितियों में एलएंडटी और इंफोसिस की बढ़त

बाजार में मची इस उथल-पुथल के बीच, शीर्ष 10 कंपनियों में से तीन ऐसी रहीं जिन्होंने सकारात्मक प्रदर्शन किया और अपने बाजार पूंजीकरण में वृद्धि दर्ज की। 19 करोड़ हो गया। यह वृद्धि कंपनी को मिले नए ऑर्डर्स और मजबूत निष्पादन क्षमताओं के कारण मानी जा रही है।

3 करोड़ का इजाफा हुआ। 36 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई। इन कंपनियों के प्रदर्शन ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने का प्रयास किया, हालांकि यह समग्र गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था।

आगामी सप्ताह में प्राथमिक बाजार की हलचल और लिस्टिंग

बाजार की वर्तमान कमजोरी के बावजूद, आगामी सप्ताह में प्राथमिक बाजार (Primary Market) में महत्वपूर्ण गतिविधियां होने की संभावना है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 30 मार्च को 'सेंट्रल माइन प्लानिंग' (Central Mine Planning) के शेयर बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने के लिए तैयार हैं। इसी दिन बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर 'स्पेशलिटी मेडिसिंस' की लिस्टिंग भी निर्धारित है।

अप्रैल के पहले सप्ताह में भी लिस्टिंग का सिलसिला जारी रहेगा। 1 अप्रैल को 'टिपको इंजीनियरिंग' के शेयर बीएसई एसएमई पर अपनी शुरुआत करेंगे। इसके बाद 2 अप्रैल को बाजार में कई नई कंपनियां कदम रखेंगी, जिनमें 'साई पैरेंटरल्स', 'पावरिका' और 'अमीर चंद जगदीश कुमार' शामिल हैं। इन कंपनियों के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट होंगे। साथ ही, बीएसई एसएमई पर 'हाईनेस माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स' की लिस्टिंग भी इसी दिन होने की उम्मीद है। बाजार के प्रतिभागी इन नई लिस्टिंग और वैश्विक संकेतों पर अपनी नजरें बनाए हुए हैं।