शेयर बाजार: सेंसेक्स ऊपरी स्तर से 900 अंक गिरा, कच्चे तेल में अस्थिरता

भारतीय शेयर बाजार में 24 मार्च को भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के कारण बाजार अपने उच्च स्तर से 900 अंक नीचे फिसल गया।

भारतीय शेयर बाजार में 24 मार्च को अत्यधिक उतार-चढ़ाव का माहौल रहा। कारोबारी सत्र की शुरुआत में बाजार ने जबरदस्त मजबूती दिखाई और सेंसेक्स करीब 2 प्रतिशत तक उछल गया। हालांकि, यह शुरुआती जोश अधिक समय तक बरकरार नहीं रह सका और ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के दबाव के कारण सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 900 अंक नीचे आ गया। बाजार की इस अस्थिरता के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी को मुख्य कारण माना जा रहा है।

73 पर कारोबार करता देखा गया। 55 के स्तर पर आ गया। बाजार में आई इस गिरावट ने शुरुआती कारोबार में बने सकारात्मक माहौल को अनिश्चितता में बदल दिया।

भू-राजनीतिक तनाव और राजनयिक अनिश्चितता

बाजार की शुरुआती तेजी का मुख्य आधार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें थीं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले टालने और बातचीत की संभावना जताने से वैश्विक बाजारों में राहत देखी गई थी। हालांकि, यह स्थिति तब बदल गई जब ईरान ने किसी भी प्रकार की बातचीत से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह संकेत दिए गए कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। इन खबरों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी, जिससे बाजार में ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू हो गई।

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर घरेलू शेयर बाजार को प्रभावित करता है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 11% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे भारतीय बाजार को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान क्रूड की कीमतें फिर से करीब 4% उछल गईं। तेल की कीमतों में इस अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंकाओं ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ा।

सेक्टरवार प्रदर्शन और प्रमुख शेयरों की स्थिति

बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद शुरुआती कारोबार में सभी 16 सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। 6% की तेजी दर्ज की गई। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे अधिक सक्रियता देखी गई और 1% की बढ़त रही। बैंक ने अपने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के दौरान उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए एक बाहरी लॉ फर्म नियुक्त की है, जिसे बाजार ने संज्ञान में लिया और ऑटो सेक्टर में बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के शेयरों में 1% से 3% तक की तेजी देखी गई।

कॉर्पोरेट अपडेट्स और अन्य प्रमुख बदलाव

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में श्रीराम फाइनेंस और आयशर मोटर्स में 3% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। एशियन पेंट्स के शेयरों में भी 2% तक का उछाल देखा गया, जिसका कारण कंपनी द्वारा उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की योजना को माना जा रहा है। इसके अलावा इंडिगो, टाइटन, ट्रेंट, अदाणी एंटरप्राइजेज, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसे शेयरों में भी 2-3% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, बाजार के समग्र सूचकांकों में गिरावट के कारण इन शेयरों की बढ़त भी सीमित रही।

मार्च महीने का बाजार रुझान और विदेशी निवेश

5% की गिरावट देखी जा चुकी है। इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही निरंतर बिकवाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं। हालांकि, कुछ घरेलू ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, ऑटो, बैंकिंग और ऑयल रिफाइनिंग जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में आने वाले समय में रिकवरी की संभावनाएं बनी हुई हैं, बशर्ते वैश्विक परिस्थितियां स्थिर हों।