भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली के भारी दबाव के चलते महज 5 मिनट के भीतर निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ की कमी आई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण इस गिरावट के साथ तेजी से नीचे गिरा और सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों ने अपने महत्वपूर्ण स्तरों को तोड़ दिया, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत $112 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। इसी चिंता के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है।
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते विवाद ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्रेंट क्रूड का $112 प्रति बैरल के पार पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जब भी वैश्विक स्तर पर इस तरह का तनाव बढ़ता है, निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों जैसे शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और इसी वैश्विक बिकवाली का असर आज भारतीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां शुरुआती कारोबार में ही भारी गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी के प्रमुख स्तरों में गिरावट
35% की भारी गिरावट के साथ 74,869 के स्तर पर आ गया। 23% टूटकर 23,238 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बुधवार को बाजार में सकारात्मक रुख था, जब सेंसेक्स 633 अंक बढ़कर 76,704 पर और निफ्टी 196 अंक बढ़कर 23,777 पर बंद हुआ था। एक ही दिन में बाजार की पूरी बढ़त समाप्त हो गई है।
बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी बिकवाली
बाजार में आई इस गिरावट ने लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है, लेकिन बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जो बाजार में व्यापक बिकवाली के दबाव को दर्शाता है। निवेशकों ने वित्तीय और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करने को प्राथमिकता दी है।
बाजार की व्यापक स्थिति और शेयरों का प्रदर्शन
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, आज कारोबार कर रहे कुल 2006 शेयरों में से 1390 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, केवल 469 शेयर ही बढ़त बनाने में कामयाब रहे, जबकि 147 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि 40 शेयर अपने एक साल के निचले स्तर (52-week low) पर पहुंच गए, जबकि केवल 12 शेयर ही अपने एक साल के उच्चतम स्तर को छू सके। सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों पर दबाव
बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी भारी गिरावट देखी गई और छोटे और मध्यम श्रेणी के शेयरों में निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की, जिससे इन सूचकांकों में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और रियल्टी सेक्टर के मिडकैप शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया और वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में निवेशकों ने अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए छोटे शेयरों से बाहर निकलना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और अधिक प्रभावित हुआ है।
