डूरंड रेखा के पास पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की 32 किमी जमीन कब्जाई

पाकिस्तान द्वारा डूरंड रेखा के पास पक्तिका प्रांत में अफगानिस्तान की लगभग 32 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कथित कब्जे की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है, हालांकि तालिबान प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर घुसपैठ से इनकार किया है।

पाकिस्तान एक ओर खुद को मध्य-पूर्व में शांतिदूत के रूप में पेश करने की कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है, वहीं दूसरी ओर डूरंड रेखा के पास अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसपैठ और जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने पक्तिका प्रांत में बाड़ लगाकर अफगानिस्तान के कम से कम 32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दावों की वास्तविकता

इस सप्ताह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना ने सीमा पर बाड़बंदी के जरिए अफगान भूमि पर स्थायी कब्जा कर लिया है। इन वीडियो के साथ 'पाकिस्तान का नक्शा फैल रहा है' जैसे शीर्षक साझा किए जा रहे हैं। वीडियो में दिखाई गई तस्वीरों में पाकिस्तानी बाड़ से घिरे उन क्षेत्रों को दिखाया गया है जो पहले अफगानिस्तान के नियंत्रण में माने जाते थे और इन दावों ने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे सीमा विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।

पक्तिका प्रांत में भौगोलिक बदलाव और बाड़बंदी

पक्तिका प्रांत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित यह विवादित क्षेत्र पाकिस्तान की ओर एक उभरे हुए हिस्से के रूप में दिखाई देता है। गूगल अर्थ की नवीनतम उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले चार वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक बाड़बंदी की गई है। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान के साथ अपनी 2640 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बाड़ लगाने का काम कर रहा है। सैटेलाइट डेटा के अनुसार, यह विशिष्ट क्षेत्र लगभग 32 वर्ग किलोमीटर का है, जहां बाड़ की स्थिति में बदलाव देखा गया है।

तालिबान प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और स्थिति

सीमा पर घुसपैठ के इन दावों के बावजूद, काबुल में तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय नुकसान से इनकार किया है। तालिबान अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान के सभी सीमावर्ती क्षेत्र उनके सुरक्षा बलों के पूर्ण नियंत्रण में हैं। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों का कहना है कि बाड़बंदी की प्रक्रिया में कई किलोमीटर जमीन पाकिस्तान की ओर चली गई है। तालिबान सरकार ने अतीत में कभी भी डूरंड रेखा को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं दी है, जिससे यह क्षेत्र हमेशा विवाद का केंद्र बना रहता है।

पाकिस्तान की क्षेत्रीय कूटनीति और मध्य-पूर्व में भूमिका

पाकिस्तान वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने के लिए सक्रिय कूटनीति का सहारा ले रहा है। इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की और अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ बैठकों का दौर जारी है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और अमेरिकी नेतृत्व के बीच हालिया संवाद भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। ईरान ने भी क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान पर भरोसा जताया है। हालांकि, अफगानिस्तान के साथ सीमा पर चल रहे इस नए विवाद ने पाकिस्तान की इन शांति पहलों के बीच उसकी क्षेत्रीय नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डूरंड रेखा का ऐतिहासिक विवाद और अंतरराष्ट्रीय मान्यता

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच एक समझौते के तहत खींची गई थी। अफगानिस्तान की लगातार सरकारों ने इस रेखा को कृत्रिम बताते हुए इसे स्वीकार करने से मना किया है, क्योंकि यह पश्तून जनजातीय क्षेत्रों को दो हिस्सों में विभाजित करती है और इसके विपरीत, पाकिस्तान इसे अपनी स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इसे आधिकारिक सीमा के रूप में मान्यता देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सीमांकन को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर सैन्य झड़पें होती रहती हैं।