सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से रखीं 3 शर्तें, अनशन खत्म करने का दिया संकेत

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपने अनशन के 23वें दिन सफदरजंग अस्पताल से तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी लेती है या सांसद संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और अब उन्होंने अपना अनशन खत्म करने के संकेत दिए हैं। सफदरजंग अस्पताल से जारी एक संदेश में वांगचुक ने तीन विशेष शर्तें रखी हैं, जिन्हें पूरा किए जाने पर वह 20 जुलाई को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर सकते हैं। वांगचुक मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हाल ही में हुई विफलताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है और उन्होंने सरकार तथा राजनीतिक प्रतिनिधियों से ठोस आश्वासन की मांग की है ताकि देश के छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

अनशन खत्म करने की तीन प्रमुख शर्तें

सफदरजंग अस्पताल से हाथ से लिखे एक नोट के माध्यम से सोनम वांगचुक ने उन शर्तों का विवरण दिया है जिनके तहत वह अपना 23 दिन पुराना अनशन समाप्त करेंगे। उनकी पहली शर्त यह है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में हाल की सभी नाकामियों की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है, जिन्होंने देश भर के छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। वांगचुक का मानना है कि जब तक सरकार अपनी जवाबदेही स्वीकार नहीं करती, तब तक सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सकता। उनकी दूसरी शर्त राजनीतिक सक्रियता से जुड़ी है। वांगचुक ने कहा कि यदि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व के साथ सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता संसद पहुंचते हैं और यह भरोसा दिलाते हैं कि वे इस मुद्दे को सदन के भीतर उठाएंगे, तो वह अपना अनशन खत्म कर देंगे। यह शर्त इस बात पर जोर देती है कि छात्रों की समस्याओं को देश की सर्वोच्च पंचायत में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

तीसरी शर्त उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए रखी गई है। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यदि उनके स्वास्थ्य बिगड़ने या किसी अन्य कारण से वह अनशन जारी रखने में असमर्थ होते हैं, तो भी वह इसे समाप्त कर सकते हैं, बशर्ते विभिन्न पार्टियों के सांसद और नेता अस्पताल आकर उन्हें वही आश्वासन दें। यानी अस्पताल में आकर नेताओं द्वारा दिया गया भरोसा भी उनके अनशन को समाप्त करने का आधार बन सकता है। ये शर्तें दर्शाती हैं कि वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

गैर-कानूनी हिरासत के आरोप

अपनी शर्तों को साझा करने के साथ-साथ सोनम वांगचुक ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया है। अपने नोट के अंत में उन्होंने लिखा कि अस्पताल में उनके आने-जाने, बोलने और हर तरह की बातचीत की आजादी पर रोक लगा दी गई है। इन आरोपों ने समर्थकों के बीच चिंता पैदा कर दी है और विरोध प्रदर्शन को एक नया मोड़ दे दिया है और एक्टिविस्ट ने अपने नोट में स्पष्ट किया कि अस्पताल के भीतर उनकी स्वतंत्रता को पूरी तरह से बाधित किया गया है।

चलो संसद मार्च और बढ़ता विरोध प्रदर्शन

वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब CJP द्वारा आयोजित चलो संसद मार्च को लेकर जंतर-मंतर पर हजारों समर्थक एकत्र हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से रात भर धरना देने का आह्वान किया है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। वहीं, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर राजनीतिक नेता शिक्षा की जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो उनके पति अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है। यह मांग हाल ही में हुए NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मामलों को लेकर की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय इन गंभीर मुद्दों को संभालने में विफल रहा है। जंतर-मंतर पर छात्रों और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है और वे शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस का रुख और सुरक्षा व्यवस्था

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई 2026 को संसद तक किसी भी मार्च के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई है और न ही दी गई है। पुलिस के इस बयान से साफ है कि संसद की ओर बढ़ने की किसी भी कोशिश को रोका जाएगा। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और 20 जुलाई की तारीख इस पूरे आंदोलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस की पाबंदियों के बीच समर्थकों का उत्साह कम नहीं हुआ है और वे वांगचुक की मांगों के समर्थन में डटे हुए हैं।