जॉर्डन की खुफिया जानकारी से ईरान ने अमेरिका के 20 ठिकानों को बनाया निशाना

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा है कि जॉर्डन की पुलिस और सेना ने अमेरिकी ठिकानों की खुफिया जानकारी दी, जिससे 20 ठिकानों पर सटीक ड्रोन हमले किए गए और भारी नुकसान हुआ।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि रविवार, 19 जुलाई को जॉर्डन में स्थित अमेरिका के कम से कम 20 सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों में उसे स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी। इस हमले के परिणामस्वरूप अमेरिका को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में अमेरिका के 2 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 1 सैनिक अभी भी लापता बताया जा रहा है। ईरान के इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है क्योंकि इसमें एक अमेरिकी सहयोगी देश की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

जॉर्डन की पुलिस और सेना पर ईरान का बड़ा दावा

तेहरान की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में यह कहा गया है कि अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने के लिए आवश्यक खुफिया जानकारी जॉर्डन की पुलिस और सेना के माध्यम से प्राप्त हुई थी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि जॉर्डन की तरफ से उन्हें अल-अजराक वायु सेना अड्डे के बारे में सटीक जानकारी दी गई थी। इसी जानकारी के आधार पर ईरान ने अपने ड्रोनों के जरिए इन ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जॉर्डन में स्थित अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रसद संयत्र पूरी तरह से तबाह हो गया है। सोशल मीडिया पर इन हमलों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें धमाकों और तबाही के मंजर को साफ देखा जा सकता है।

सटीक हमलों से अमेरिका में मची खलबली

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जिस सटीकता के साथ हमले किए गए हैं, उसने अमेरिकी रक्षा विभाग को हैरान कर दिया है। शुरुआत में अमेरिका को यह संदेह था कि इन हमलों के पीछे चीन की खुफिया रिपोर्ट का हाथ हो सकता है, क्योंकि हमलों की सटीकता किसी उन्नत खुफिया तंत्र की ओर इशारा कर रही थी और हालांकि, अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के ताजा बयान ने पूरी जांच की दिशा और दशा को बदल कर रख दिया है। यदि ईरान का यह दावा सच साबित होता है कि जॉर्डन की सेना ने उसे जानकारी दी थी, तो यह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य रणनीति के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। फिलहाल, जॉर्डन की सेना ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और चुप्पी साधे रखी है।

क्षेत्र में अमेरिकी नुकसान का बढ़ता आंकड़ा

ईरान के इन हमलों ने केवल जॉर्डन तक ही सीमित प्रभाव नहीं डाला है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को चुनौती दी है। वाशिंगटन पोस्ट द्वारा सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर की गई एक जांच में यह खुलासा हुआ है कि ईरान के हमलों के कारण खाड़ी और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कम से कम 228 ढांचे और सैन्य उपकरण या तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या उन्हें गंभीर क्षति पहुंची है। इसमें कुवैत, कतर और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी शामिल हैं, जो अब बर्बादी की कगार पर हैं।

युद्ध में हताहतों की संख्या और वर्तमान स्थिति

इस संघर्ष में मानवीय क्षति भी लगातार बढ़ रही है। जॉर्डन में हुए ताजा हमले में 2 सैनिकों की मौत और 1 के लापता होने के अलावा, इससे पहले इराक में भी ईरान के हमले में अमेरिका का 1 सैनिक मारा गया था। आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस पूरी जंग में अमेरिका के करीब 20 सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। अमेरिका ने फिलहाल जॉर्डन के ताजा हमले और अपने सैनिकों की मौत को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे एक गंभीर सुरक्षा चूक मान रहे हैं। ईरान का दावा है कि उसके पास मौजूद खुफिया जानकारी ने उसे उन ठिकानों को निशाना बनाने में मदद की जिन्हें अमेरिका ने सुरक्षित मान रखा था।