अमेरिका ईरान युद्ध की आहट: हवाई हमलों से दहला मिडिल ईस्ट, होर्मुज स्ट्रेट ठप

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। पिछले महीने हुआ अंतरिम समझौता टूटने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नौवीं रात भी भीषण हवाई हमले किए हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुक गई है और जॉर्डन की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलों से इजराइल तक युद्ध फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

मध्य पूर्व में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अमेरिका और ईरान अब पूर्ण युद्ध के मुहाने पर खड़े नजर आ रहे हैं। पिछले महीने दोनों देशों के बीच लड़ाई को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए जो अंतरिम समझौता हुआ था, वह अब पूरी तरह से टूट चुका है और इस समझौते के विफल होने का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट में देखने को मिल रहा है, जहां जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के निरंतर हवाई हमले

अमेरिकी सेना ने आज तड़के इस बात की पुष्टि की है कि उसने ईरान को निशाना बनाते हुए हवाई हमलों का एक नया और भीषण दौर शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों की आधिकारिक घोषणा की है। उल्लेखनीय है कि यह लगातार 9वीं रात है जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी ठिकानों पर बमबारी की है। सेंट्रल कमांड द्वारा जारी एक बयान में स्पष्ट किया गया है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और नष्ट करना है, जिनका उपयोग होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नाविकों पर हमले करने के लिए किया जाता है।

इराक में अमेरिकी सैनिक की मौत और हताहतों का आंकड़ा

रविवार को अमेरिका ने ईरान पर और अधिक हवाई हमले शुरू करने के साथ ही अपने एक और सैनिक की मौत की दुखद घोषणा की। अमेरिकी सेना के अनुसार, शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया था। इस ड्रोन को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की जान चली गई। इस ताजा घटना के बाद, वर्तमान संघर्ष शुरू होने से लेकर अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 17 हो गई है। इसके अतिरिक्त, सेना ने बताया कि रविवार को कुछ अज्ञात अवशेष भी मिले हैं जिनकी जांच की जा रही है। ये अवशेष उस सैनिक के हो सकते हैं जो पिछले दिनों हुए एक हमले के बाद से लापता था।

बुनियादी ढांचे पर प्रहार और क्षेत्रीय प्रभाव

युद्ध का यह नया दौर अब दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी हमलों में ईरान के पुलों, पानी को खारापन-मुक्त करने वाले विशेष संयंत्रों और बिजली उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाया गया है। ये ऐसी सुविधाएं हैं जिन पर लाखों आम नागरिकों का जीवन निर्भर है। दूसरी ओर, तेहरान ने भी पलटवार करते हुए पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान की ओर से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों के खतरे को देखते हुए कुवैत, जॉर्डन और बहरीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को फिर से सक्रिय कर दिया है।

इजराइल तक पहुंच सकती है जंग की आग

इस संघर्ष के और अधिक फैलने की आशंका तब और बढ़ गई जब ईरान ने जॉर्डन की दिशा में मिसाइलें दागनी शुरू कीं। इजराइल ने इस स्थिति पर गंभीर चेतावनी जारी की है। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी देश जॉर्डन की ओर दागी गई इन मिसाइलों के कारण हफ्तों में पहली बार जंग की आग इजराइली इलाकों तक भी पहुंच सकती है और अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि उसके इन हमलों का मुख्य मकसद ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड को निशाना बनाना है। यह कार्रवाई जॉर्डन में पिछले शुक्रवार को अमेरिकी सैनिकों की हत्या का बदला लेने के लिए की जा रही है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरा क्षेत्र एक बड़े सैन्य संकट की चपेट में आता दिख रहा है।