ईरान से जंग में बेनकाब हुई अमेरिकी वायुसेना, हूती हमलों ने उड़ाई ट्रंप के देश की नींद

यमन में हूती विद्रोहियों और ईरान के हमलों ने अमेरिकी वायुसेना के विमानों और ड्रोन्स को भारी नुकसान पहुंचाया है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, दर्जनों एमक्यू-9 रीपर और एफ-15ई लड़ाकू विमान नष्ट हो चुके हैं, जिससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य साख पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेना कहे जाने वाले अमेरिका के सैन्य विमानों और ड्रोन्स को मिल रहे लगातार झटकों ने वैश्विक रक्षा जगत में उसके हथियारों की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यमन में हूती विद्रोहियों और ईरान के हमलों से अमेरिकी वायुसेना के विमान और ड्रोन बार-बार नुकसान झेल रहे हैं। इससे अमेरिका की वैश्विक साख पर सवाल उठने लगे हैं। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा एक लोकल मिसाइल से अमेरिकी एफ-15 को मार गिराने के दावे ने इस बहस को और तेज कर दिया है। यह स्थिति दर्शाती है कि किस तरह से अमेरिकी आसमानी ताकत को युद्ध के मैदान में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

संघर्ष का घटनाक्रम और अमेरिकी एयर पावर को क्षति

ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी 2026 से जारी संघर्ष अब लगभग 203 दिन यानी करीब 7 महीने का हो चुका है। इस दौरान अमेरिकी एयर पावर को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि जून में एक समझौता हुआ था, लेकिन जुलाई से दोबारा शुरू हुई गोलीबारी के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और हमले अभी भी जारी हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो देश कभी दूसरों की सैन्य क्षमताओं पर सवाल उठाते थे, आज उनके अपने आधुनिक विमान और ड्रोन युद्ध के मैदान में लगातार धराशायी हो रहे हैं। हूती और ईरान के हमलों से अमेरिकी विमानों को जो नुकसान हुआ है, उसने पेंटागन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

पेंटागन की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े

पेंटागन इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट और अन्य रक्षा स्रोतों के अनुसार, इस संघर्ष में अमेरिका को दर्जनों विमानों और ड्रोन्स का नुकसान झेलना पड़ा है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। जून तक लगभग 30 ड्रोन नष्ट हुए थे, जो अगस्त तक बढ़कर 45 तक पहुंच गए और सितंबर में भी यह सिलसिला जारी है। यह ड्रोन अमेरिकी निगरानी और हमले की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन इनकी इतनी बड़ी संख्या में बर्बादी ने तकनीकी श्रेष्ठता पर सवाल उठाए हैं।

विमानों और हेलीकॉप्टरों को हुआ भारी नुकसान

लड़ाकू विमानों की बात करें तो एफ-15ई स्ट्राइक ईगल के कुल 4 विमान नष्ट हुए हैं। इनमें से 3 विमान कुवैत में फ्रेंडली फायर यानी अपनी ही सेना की गलती से नष्ट हुए और 1 विमान ईरान के ऊपर गिरा। सितंबर में कुछ अन्य विमानों के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है। अन्य विमानों में एफ-35ए (कम से कम 1 क्षतिग्रस्त), ए-10 (1 गंभीर क्षति), और केसी-135 टैंकर (जमीन पर ईरानी हमलों या दुर्घटनाओं में 7 क्षतिग्रस्त या नष्ट) शामिल हैं। इसके अलावा एएच-64, एमएच-60 जैसे कई हेलीकॉप्टर और ई-3 अवाक्स भी इसकी चपेट में आए हैं।

आधुनिक युद्धनीति और भविष्य की चुनौतियां

इनमें से कई नुकसान फ्रेंडली फायर, तकनीकी दुर्घटनाओं या जमीन पर हुए हमलों का नतीजा भी हैं। लेकिन यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र बदल रहा है। अब कम लागत वाले छोटे ड्रोन और अपेक्षाकृत सस्ते एयर-डिफेंस हथियार करोड़ों डॉलर के महंगे अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। आज सवाल सिर्फ अमेरिकी विमानों की साख का नहीं, बल्कि बदलती युद्धनीति में उनकी रणनीतिक सफलता का है। अमेरिकी एयर पावर की असली परीक्षा अब विमानों की गिनती से नहीं, बल्कि उनकी सर्वाइवेबिलिटी यानी सुरक्षित रहने की क्षमता और दुश्मन के एयर डिफेंस को भेदने की आधुनिक तकनीक से होगी।