सऊदी अरब पर हूती हमलों पर भारत सख्त, पाकिस्तान ने दिया सुरक्षा का बड़ा वचन

भारत ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों को अस्वीकार्य और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। वहीं, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने और बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है।

भारत ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है। भारत सरकार का मानना है कि इस तरह की हिंसक गतिविधियां न केवल सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं, बल्कि ये पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक गंभीर संकट पैदा करती हैं। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को लगातार खतरा बना हुआ है।

हूती हमलों का विवरण और उनका प्रभाव

हूती विद्रोहियों ने हाल के समय में सऊदी अरब के विभिन्न क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए अपने हमलों में तेजी लाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्रोहियों ने खमीस मुशायत, आभा और ताइफ जैसे प्रमुख शहरों पर हमले किए हैं। इन हमलों को अंजाम देने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और आधुनिक ड्रोनों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है। इन हमलों के परिणामस्वरूप कई निर्दोष नागरिक घायल हुए हैं और वहां के आवश्यक बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सऊदी अरब के लिए ये हमले सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती बन गए हैं, जिसके कारण दुनिया भर के देशों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा चिंताएं

भारत ने इन हमलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने वाले हैं। भारत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि ये हमले बाब अल मंदेब के महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, भारत ने सऊदी अरब के वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों और पवित्र शहर मक्का पर हमले के किसी भी प्रयास की भी कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यमन में बिगड़ते सुरक्षा हालात पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की है। मीडिया से बातचीत के दौरान रणधीर जायसवाल ने कहा कि यमन में सुरक्षा की स्थिति जिस तरह से खराब हो रही है, उससे भारत बहुत चिंतित है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हम सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्रों, विशेष रूप से आम नागरिकों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की निंदा करते हैं। उन्होंने मक्का शहर पर हमले की कोशिश को भी अत्यंत निंदनीय बताया और जायसवाल ने आगे कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को अस्थिर करते हैं और बाब अल मंदेब में मुक्त पोत परिवहन के लिए खतरा पैदा करते हैं। भारत ने उम्मीद जताई है कि इस क्षेत्र में जल्द ही शांति और स्थिरता की बहाली होगी।

पाकिस्तान का सऊदी अरब को बिना शर्त समर्थन

भारत की निंदा के साथ-साथ पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बयान जारी कर कहा है कि इस्लामाबाद सऊदी अरब की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी देश की सुरक्षा के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पूरी तरह से बिना किसी शर्त के है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान कूटनीतिक और भौतिक दोनों ही रूपों में सऊदी अरब के साम्राज्य के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने दोहराया कि सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान हर संभव कदम उठाएगा।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता और उसका महत्व

पाकिस्तान का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले महीने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत यह प्रावधान किया गया है कि यदि इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता इन देशों के बीच सैन्य सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाता है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है, जो इस त्रिपक्षीय गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है।

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता तनाव

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। हूती विद्रोहियों ने न केवल सऊदी अरब के शहरों को निशाना बनाया है, बल्कि लाल सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य पर भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है। विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले किए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इन हमलों का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।