अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एचआर मैकमास्टर ने सऊदी अरब और पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण विश्लेषण में कहा है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी विजन 2030 पर पड़ सकता है। मैकमास्टर के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस समय एक अत्यंत जटिल भू-राजनीतिक स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां उनकी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। क्षेत्रीय हमलों और अस्थिरता के कारण सऊदी अरब के भविष्य के लक्ष्यों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
विजन 2030 और सुरक्षा का गहरा संकट
मैकमास्टर ने स्पष्ट किया कि हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय हमलों के कारण क्राउन प्रिंस के विजन 2030 और उनकी आर्थिक योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा ढांचे पर किसी भी बड़े हमले से विजन 2030 को गंभीर नुकसान होने का खतरा है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त कर वित्त, तकनीक, एआई और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विस्तार करना चाहता है, लेकिन इसके लिए क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा का होना अनिवार्य है और मैकमास्टर का मानना है कि यदि सुरक्षा का माहौल नहीं होगा, तो विदेशी निवेश और आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा।
मक्का पर हमले का खतरा और बढ़ती चुनौतियां
मैकमास्टर ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि खतरा अब केवल सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मक्का भी हमलों की चपेट में आ चुका है। उनके मुताबिक, यही स्थिति क्राउन प्रिंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैदा कर रही है और उन्होंने कहा कि सिर्फ सऊदी का इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि मक्का भी हमले की चपेट में आया है, जिससे सुरक्षा की गंभीरता और बढ़ गई है। क्राउन प्रिंस का आर्थिक मॉडल और विजन 2030 पूरी तरह से ऐसे माहौल पर निर्भर करता है जहां सुरक्षा और स्थिरता की गारंटी हो। जब पवित्र स्थल और महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र दोनों ही खतरे में हों, तो विकास की गति धीमी पड़ सकती है।
"आखिर मेरी हिफाजत कौन करेगा?" - एक बड़ा सवाल
मैकमास्टर ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी चिंता को एक सरल लेकिन गहरे सवाल के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि अगर सऊदी अरब एक वैश्विक वित्तीय केंद्र बनना चाहता है, कंप्यूटिंग पावर और डेटा सेंटर का बड़ा केंद्र बनना चाहता है और एआई क्रांति में अहम भूमिका निभाना चाहता है, तो उसे एक सुरक्षित माहौल की आवश्यकता है। " यह सवाल उस असुरक्षा की भावना को दर्शाता है जो बड़े आर्थिक लक्ष्यों के साथ जुड़ी हुई है।
अमेरिका के सुरक्षा भरोसे पर गहराता संदेह
मैकमास्टर ने रियाद और वाशिंगटन के बीच के सुरक्षा संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के मन में इस बात को लेकर संदेह हो सकता है कि अमेरिका लंबे समय तक अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को निभाएगा या नहीं। हालांकि अमेरिका के साथ कई समझौते और युद्धविराम की स्थितियां रही हैं, लेकिन अमेरिकी राजनीति की अनिश्चितता एक बड़ा कारक है। मैकमास्टर के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अतीत में कठिन और जोखिम भरे फैसले लिए हैं, लेकिन उनकी नीति में यह सोच भी स्पष्ट है कि दूसरे देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। यही कारण है कि क्राउन प्रिंस को अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर संदेह हो सकता है।
ईरान की बांटने वाली राजनीति और क्षेत्रीय रणनीति
मैकमास्टर ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह खाड़ी देशों के बीच मतभेद पैदा करने के लिए उनकी सुरक्षा चिंताओं का फायदा उठा रहा है। ईरान की रणनीति यह है कि वह अलग-अलग समय पर अलग-अलग खाड़ी देशों को निशाना बनाता है ताकि उनके बीच की एकजुटता को कमजोर किया जा सके। उदाहरण के तौर पर, हाल के हमलों में सऊदी अरब को निशाना बनाया गया, लेकिन इस बार अमीरात या कतर को नहीं। मैकमास्टर का कहना है कि ईरान का मुख्य मकसद खाड़ी देशों को बांटना है, ताकि वे ईरान के खिलाफ एक साझा संकल्प और एकजुटता न बना पाएं।
क्षेत्रीय गठबंधन और मक्का पैक्ट की भूमिका
सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सऊदी अरब ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। मैकमास्टर ने बताया कि सऊदी अरब ने मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को बेहतर किया है और इन प्रयासों में मक्का पैक्ट जैसी महत्वपूर्ण पहल भी शामिल है। हालांकि, इन गठबंधनों के बावजूद, मैकमास्टर का मानना है कि आर्थिक तरक्की के लिए सबसे जरूरी चीज क्षेत्र में वास्तविक स्थिरता और सुरक्षा है। सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं अब उसकी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं से पूरी तरह जुड़ गई हैं, और हूतियों की बढ़ती ताकत इस दिशा में एक बड़ा अवरोध बनी हुई है।
निष्कर्ष: सुरक्षा और आर्थिक विकास का अटूट संबंध
मैकमास्टर के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सऊदी अरब के लिए विजन 2030 केवल एक आर्थिक योजना नहीं है, बल्कि यह उसकी सुरक्षा स्थिति पर भी निर्भर है। तकनीक, एआई और डेटा सेंटर के क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनने के लिए सऊदी अरब को एक ऐसे सुरक्षा कवच की जरूरत है जो विश्वसनीय और दीर्घकालिक हो। जब तक क्षेत्रीय हमलों का खतरा बना रहेगा और सुरक्षा सहयोगियों पर संदेह रहेगा, तब तक विजन 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। क्राउन प्रिंस के सामने अब सबसे बड़ा कार्य अपनी सुरक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत करना है कि वह उनकी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को सुरक्षा प्रदान कर सके।
