- भारत,
- 12-Jul-2024 11:40 AM IST
- (, अपडेटेड 12-Jul-2024 10:43 AM IST)
Captain Anshuman Singh: बहू हमारा घर छोड़कर जा चुकी है। उसने अपना एड्रेस भी चेंज करा लिया। कीर्ति चक्र मिलने की कोई निशानी भी हमारे पास नहीं। बेटे की फोटो पर कीर्ति चक्र लगा सकूं, हम इस लायक भी नहीं। सब कुछ बहू को दे दिया गया। अब इस सम्मान के नियमों में बदलाव होना चाहिए। बहुएं घर छोड़कर भाग जाती हैं। ऐसे में माता-पिता को कुछ नहीं मिलता। यह कहना है कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद अंशुमान सिंह के माता-पिता का। उन्होंने मंगलवार को रायबरेली जाकर सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर इस बात को रखा था। उनका कहना है- हम इस मुद्दे को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने भी उठा चुके हैं।पिता बोले- हमारे पास कीर्ति चक्र पाने का कोई सबूत नहींशहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह JCO के पद से सेना से रिटायर्ड हैं। वे कहते हैं- बहू स्मृति यहां से सब कुछ लेकर चली गई। उसने अपना एड्रेस भी चेंज करवा लिया। हमारे पास कीर्ति चक्र की कोई रिसीविंग भी नहीं है। वह भी बहू ले गई।मां मंजू सिंह ने बताया- बहुएं भाग जाती हैं। माता-पिता का भी सम्मान होना चाहिए। हमने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रायबरेली के सांसद राहुल गांधी से आग्रह किया कि सेना में शहीद होने वाले युवाओं के परिवार में बहू के अलावा माता-पिता का भी ख्याल रखना चाहिए।पिता रवि प्रताप सिंह ने कहा- मेरा बेटा शादी के 3 महीने बाद शहीद हो गया। उसके कुछ दिन बाद ही बहू स्मृति घर छोड़कर चली गई। जब सम्मान दिया गया, तो स्मृति के साथ मेरी पत्नी को भी बुलाया गया। लेकिन, सम्मान सिर्फ बहू स्मृति को दिया गया। बहू तो अलग रहती है। इसलिए हमारे पास कुछ भी नहीं आया। मेरे पास बेटे की फोटो के अलावा कुछ भी नहीं। यहां तक कि कीर्ति चक्र का बैज भी हमें उसकी (अंशुमान) फोटो पर लगाने के लिए नहीं मिला।'हमने बड़े अरमानों से की थी शादी'शहीद अंशुमान सिंह के पिता राम प्रताप सिंह ने आजतक से बात करते हुए कहा कि हमने बेटे की मर्जी से ही स्मृति से शादी की थी. हमने बड़े धूमधाम से और अरमानों के साथ शादी की थी. शादी में ना हमारी तरफ से और ना ही स्मृति के परिवार वालों की तरफ से कोई कमी रखी गई. हम सब बहुत खुश थे. शादी के बाद स्मृति नोएडा में बीडीएस की पढ़ाई कर रही मेरी बेटी के साथ फ्लैट में ही रहने लगी थी.'हम स्मृति की शादी कराने को तैयार थेउन्होंने कहा, '19 जुलाई 2023 को जब बेटा शहीद हुआ, तब बहू स्मृति और बेटी नोएडा में ही थे. मैंने ही कह कर दोनों को कैब से लखनऊ बुलवाया और लखनऊ से हम गोरखपुर गए. वहां अंतिम संस्कार किया गया. लेकिन तेरहवीं के अगले ही दिन बहू स्मृति ने घर जाने की जिद कर ली.' राम प्रताप सिंह ने कहा, 'स्मृति के पिता ने बेटी की पूरी जिंदगी का हवाला दिया तो मैंने खुद कहा कि अब यह मेरी बहू नहीं बेटी है और अगर स्मृति चाहेगी तो हम दोनों मिलकर इसकी दोबारा शादी करेंगे और बेटी के तौर पर मैं विदा करूंगा.''तेरहवीं के अगले दिन नोएडा चली गई स्मृति'उन्होंने आगे बताया, 'स्मृति तेरहवीं के अगले दिन अपनी मां के साथ नोएडा चली गई. नोएडा में वह मेरे बेटे से जुड़ी हर चीज, उसकी तस्वीर, उसकी शादी के एल्बम सर्टिफिकेट कपड़े सब लेकर अपने मां-बाप के पास चली गई. हमें इसकी जानकारी तब हुई जब मेरी बेटी वापस नोएडा गई तो वहां फ्लैट में बेटे अंशुमान का कोई भी समान नहीं था.'शहीद अंशुमान के पिता ने कहा, 'बेटे को उसके अदम्य साहस के लिए कीर्ति चक्र मिला तो नियम था कि मां और पत्नी दोनों यह सम्मान लेने के लिए जाते हैं. अंशुमान की मां भी साथ गई थीं. राष्ट्रपति ने मेरे बेटे की शहादत पर कीर्ति चक्र दिया लेकिन मैं तो उसको एक बार छू भी नहीं पाया.''मैसेज किया, फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया'उस समारोह को याद करते हुए अंशुमान की मां मंजू सिंह ने कहा, '5 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में मैं और स्मृति साथ गए थे. समारोह से बाहर निकले तो सेना के अधिकारियों के कहने पर फोटो खिंचाने के लिए फिर कीर्ति चक्र एक बार मेरे हाथ में आया लेकिन फोटो खिंचाते ही स्मृति ने दोबारा वह कीर्ति चक्र ले लिया. फिर कभी अपने बेटे की शहादत का वह सम्मान हमें छूने को नहीं मिला.'सेना से रिटायर रामप्रताप सिंह कहते हैं, 'सरकार ने शहीद बेटे की याद में मूर्ति लगवाने का फैसला किया तो हमने बहू को मैसेज किया. उनके पिता को बताया कि कम से कम एक बार उस मूर्ति अनावरण के कार्यक्रम के लिए ही वह कीर्ति चक्र लेकर आ जाए लेकिन कोई जवाब नहीं आया.' स्मृति बोलीं- जिसकी जैसी सोच, वो वैसा ही कहेगाकैप्टन अंशुमान के माता-पिता के आरोपों पर स्मृति ने कहा- मुझे अभी कोई जानकारी नहीं है। जिसकी जैसी सोच है, वो वैसा ही कहेगा। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। अभी मैं बाहर आई हूं। पहले वीडियो भेज दीजिए। फिर कॉल करेंगे। पत्नी स्मृति पेशे से इंजीनियर हैं और उनके माता-पिता स्कूल के प्रधानाचार्य हैं।स्मृति के पिता ने कुछ भी बोलने से किया इनकारहमारी टीम जब पंजाब के दीनानगर स्थित स्मृति के घर पहुंची तो वहां उनके पिता राजेश सैनी मिले। स्मृति के सास-ससुर के आरोपों पर राजेश सैनी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी स्मृति कहीं बाहर गई हुई हैं और वे देर शाम तक घर लौटेंगी। स्मृति को इस पूरे मामले में कुछ कहना होगा तो वही अपना पक्ष देगी। हमारे परिवार के बाकी किसी मेंबर को स्मृति के सास-ससुर के आरोपों पर कुछ भी नहीं कहना।राजेश सैनी ने यह भी कहा कि स्मृति के सास-ससुर ने जो आरोप लगाए हैं, हमारे परिवार को मीडिया से ही उसके बारे में पता चला है।
