कृषि कानून / किसान आंदोलन का आज 40वा दिन,सरकार और किसानों की बैठक जारी

Zoom News : Jan 04, 2021, 06:10 PM
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का आज 40वां और अहम दिन है। दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों की सरकार के साथ 8वें राउंड की बातचीत चल रही है। मीटिंग में सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश मौजूद हैं। मीटिंग के दौरान सरकार ने किसानों के लिए खाने की व्यवस्था की थी। लेकिन, किसानों ने सरकार का खाना खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपने लंगर का खाना ही खाया।


किसानों की बैठक के दौरान करीब 200 लोगों का खाना लंगर से विज्ञान भवन पहुंचाया गया था। पिछली मीटिंग में भी किसानों ने लंगर का खाना ही खाया था। उस समय केंद्रीय मंत्रियों ने भी किसानों के साथ ही लंच किया था।


दो मसले अब भी अनसुलझे, आज नहीं बनी बात तो आगे क्या होगा?


न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, किसानों को समझाने के लिए सरकार कानूनों के हर क्लॉज पर चर्चा कर सकती है। मीटिंग में जाने से पहले कृषि मंत्री ने कहा कि आज पॉजिटिव सॉल्यूशन की उम्मीद है। वहीं किसान संगठनों ने कहा है सरकार ने मांगें नहीं मानी तो प्रदर्शन तेज किया जाएगा।


अपडेट्स:


  • मीटिंग में आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।
  • ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोला ने कहा, 'यह सरकार पर है कि वह किसानों की समस्याओं का हल निकालना चाहती है या फिर उनके खिलाफ साजिश कर उनके संघर्ष को कमजोर करना चाहती है। हमें उम्मीद है कि सरकार मानवीय सोच रखेगी।'
  • भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, 'आंदोलन के दौरान अब तक 60 किसानों की जान जा चुकी है। हर 16 घंटे में एक किसान मर रहा है। सरकार की जवाबदेही बनती है।'
  • किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब और हरियाणा में रिलायंस जियो के टावर और ऑफिसों में पिछले दिनों काफी तोड़फोड़ हुई थी। ऐसे में रिलायंस ने सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी लगाई। कंपनी ने कहा कि सरकार को तुरंत दखल देकर गुंडागर्दी रोकनी चाहिए।
  • किसान मजदूर संघर्ष समिति, पंजाब के जॉइंट सेक्रेटरी सुखविंदर सिंह ने कहा है कि कृषि कानूनों को वापस लेने और MSP की गारंटी की मांगें पूरी नहीं हुईं तो 6 जनवरी को भी ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।
30 दिसंबर की मीटिंग में 2 मुद्दों पर सहमति बनी थी:

1. पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं होंगे: अभी 1.करोड़ रुपए जुर्माना और 5 साल की कैद का प्रोविजन है। सरकार इसे हटाने को राजी हुई।

2. बिजली अधिनियम में बदलाव नहीं: किसानों को आशंका है कि इस कानून से बिजली सब्सिडी बंद होगी। अब यह कानून नहीं बनेगा।


...इसलिए किसानों की उम्मीद बढ़ी और रुख नरम हुआ:


2 मुद्दों पर सहमति बनने के बाद किसानों के रुख में नरमी दिखी और उन्होंने 31 दिसंबर को होने वाली ट्रैक्टर रैली को टाल दिया। आज इन 2 अहम मुद्दों पर बातचीत होगी।


हल निकलने की क्या उम्मीद?:

सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में किसानों के बड़े मुद्दों का हल भी निकल सकता है। सरकार समर्थन मूल्य (MSP) और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के मुद्दों पर लिखित में भरोसा दे सकती है। इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था की जा सकती है कि प्राइवेट कंपनियां मंडियों में MSP से कम भाव पर फसलों की खरीद नहीं कर पाएं।


पिछली 7 में से सिर्फ 1 बैठक का नतीजा निकला:


पहला दौरः 14 अक्टूबर

क्या हुआः मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे।


दूसरा दौरः 13 नवंबर

क्या हुआः कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।


तीसरा दौरः 1 दिसंबर

क्या हुआः तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की मांग पर ही अड़े रहे।


चौथा दौरः 3 दिसंबर

क्या हुआः साढ़े 7 घंटे तक बातचीत चली। सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। किसानों का कहना था सरकार MSP पर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानून भी रद्द करे।


5वां दौरः 5 दिसंबर

क्या हुआः सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि कानून रद्द करने पर सरकार हां या न में जवाब दे।


6वां दौरः 8 दिसंबर

क्या हुआः भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया।


7वां दौर: 30 दिसंबर

क्या हुआ: नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दो मुद्दों पर मतभेद कायम, लेकिन दो पर रजामंदी बनी

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