ट्रंप का ईरान पर तीखा हमला: समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है तेहरान।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है। उन्होंने नाटो की भूमिका और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता पर भी तीखी टिप्पणी की, जबकि ईरान ने अमेरिका की 15 शर्तों को खारिज कर दिया है।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया है कि ईरानी नेतृत्व अब समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है। यह बयान तब आया है जब ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। ईरान ने अपनी ओर से 5 शर्तें रखी हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तत्काल किसी समझौते की संभावना धूमिल होती दिख रही है। ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान की वर्तमान स्थिति को एक आपदा करार दिया और कहा कि वे अब वापसी करने की स्थिति में नहीं हैं।

ईरान की हार और समझौते की स्थिति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरान को अब अपनी करारी हार का एहसास हो गया है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारी अब सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि उनके लिए स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान केवल इसलिए बातचीत की मेज पर आ रहा है क्योंकि उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि ईरानी वार्ताकार चतुर हैं और बेहतरीन तरीके से बातचीत करते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वे पूरी तरह से घिर चुके हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी दबाव में नहीं है, बल्कि ईरान ही है जो समझौते के लिए हाथ-पांव मार रहा है।

खामेनेई और नेतृत्व पर ट्रंप की टिप्पणी

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का जिक्र करते हुए उन्हें सनकी करार दिया और ट्रंप ने कहा कि उन्हें उस नेतृत्व को रोकना पड़ा जो अब सक्रिय नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वह नेता इतना सर्वोच्च नहीं था जितना उसे बताया जाता था। ट्रंप ने ईरान के आंतरिक नेतृत्व संकट और उनकी रणनीतिक विफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि ईरान अब उस स्थिति में नहीं है जहां वह अमेरिका को चुनौती दे सके।

नाटो और ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल

ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम में नाटो (NATO) और ब्रिटेन की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने इसे नाटो के लिए एक परीक्षा करार दिया और कहा कि यह देखा जाना था कि क्या वे अमेरिका की मदद करेंगे। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सहयोग नहीं मिला, तो अमेरिका इसे याद रखेगा। वहीं ब्रिटेन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ब्रिटिश विमानवाहक पोत अमेरिकी सैन्य शक्ति के सामने बहुत छोटे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता था और अमेरिका भी दूसरों के युद्धों में घसीटे जाने का इच्छुक नहीं है।

मिसाइल क्षमता और होर्मुज जलडमरूमध्य

सैन्य क्षमताओं पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने ईरान की मिसाइल शक्ति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान की एक मिसाइल 2,500 मील तक की दूरी तय करने में सक्षम पाई गई, जबकि पहले यह माना जाता था कि उनके पास ऐसी तकनीक नहीं है। ट्रंप ने कहा कि इस मामले में अमेरिका का आकलन सही साबित हुआ। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान सही शर्तों पर समझौता कर लेता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए खोला जा सकता है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की रणनीति

ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्हें तेल की कीमतों में भारी उछाल और शेयर बाजार में गिरावट की आशंका थी, लेकिन बाजार ने स्थिरता दिखाई है। उनके अनुसार, निवेशकों को अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर भरोसा है और ट्रंप के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की है कि ईरान को दी गई 15-सूत्रीय योजना अभी भी मेज पर है और समझौते की मजबूत संभावना बनी हुई है, बशर्ते ईरान अपनी जिद छोड़े। फिलहाल, अमेरिका अपनी शर्तों पर अडिग है और ईरान की 5 शर्तों को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा है।