अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मंगलवार को टेलीफोन पर उच्च स्तरीय बातचीत हुई। इस वार्ता का मुख्य केंद्र मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी गंभीर सुरक्षा संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव रहे। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) का खुला रहना अत्यंत आवश्यक है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देशों के प्रमुखों ने क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संपर्क में रहने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस बातचीत की जानकारी साझा की और शांति बहाली के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।
द्विपक्षीय वार्ता और शांति के प्रयास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई इस बातचीत में मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से तनाव कम करने और कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने का पक्षधर रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध की स्थिति को जल्द से जल्द समाप्त कर शांति बहाल की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व
वार्ता के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे तेल आपूर्ति में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट के रूप में चिन्हित किया है और ट्रंप और मोदी ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए इसकी सुरक्षा भारत के लिए राष्ट्रीय हित का विषय है।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री का संबोधन और ऊर्जा सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में भी मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार का रुख स्पष्ट किया और उन्होंने सदन को बताया कि भारत सरकार इस युद्ध के बीच अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने दुनिया के सामने ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल और गैस खरीदने के विकल्पों पर काम कर रहा है। भारत लगातार ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि तनाव को कम किया जा सके।
संघर्ष का मानवीय प्रभाव और हताहतों के आंकड़े
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने अब तक भारी तबाही मचाई है। पिछले 25 दिनों से जारी इस युद्ध में अब तक 2600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में सबसे अधिक नुकसान हुआ है जहां करीब 1500 लोगों की मौत हुई है। लेबनान में भी स्थिति अत्यंत गंभीर है, वहां 1000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजराइल में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि संघर्ष के दौरान 13 अमेरिकी सैनिकों ने भी अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में समुद्र और जमीन पर होने वाले हमलों में कई आम नागरिक भी हताहत हुए हैं। युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के बिजली और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत चल रही है और युद्ध को समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है और ट्रंप के बयान तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। इस विरोधाभास ने क्षेत्र में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है ताकि एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को टाला जा सके।
