अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही सैन्य और खुफिया विभागों में बड़े स्तर पर फेरबदल की प्रक्रिया तेज हो गई है। आधिकारिक रिपोर्टों और मीडिया दस्तावेजों के अनुसार, प्रशासन द्वारा औसतन हर 30 दिन में एक शीर्ष सैन्य या सुरक्षा अधिकारी को पद से हटाया जा रहा है। सरकार इन बदलावों को एक भरोसेमंद और वैचारिक रूप से संरेखित टीम बनाने की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है। हालांकि, इन निर्णयों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
शीर्ष पदों पर नियुक्तियों में निरंतर बदलाव
अटलांटिक न्यूज और अन्य आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों को बदलने की योजना बनाई है। इसमें एफबीआई (FBI) के प्रस्तावित निदेशक काश पटेल, आर्मी सेक्रेटरी डैनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डेरेमर जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें भविष्य में पद छोड़ना पड़ सकता है। इससे पहले पाम बॉन्डी और क्रिस्टी नोएम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रशासनिक फेरबदल का सामना करना पड़ा है। नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक के पद से जो केंट को हटाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके पद से मुक्त कर दिया है, जो सेना के भीतर एक बड़े बदलाव का संकेत है।
सैन्य नेतृत्व और जॉइंट चीफ्स में व्यापक फेरबदल
अगस्त 2025 तक की समयसीमा के भीतर अब तक लगभग 12 उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा चुका है या उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। इस सूची में जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल चार्ल्स सीक्यू ब्राउन जूनियर, एनएसए और साइबर कमांड प्रमुख जनरल टिम हॉग, और नेवी ऑपरेशंस प्रमुख एडमिरल लिसा फ्रांचेटी जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कोस्ट गार्ड प्रमुख एडमिरल लिंडा फेगन और एयर फोर्स के वाइस चीफ जनरल जेम्स स्लाइफ को भी प्रशासनिक बदलावों के तहत पदमुक्त किया गया है। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल जेफ्री क्रूज को विश्वास की कमी के आधार पर हटाया गया, जबकि एयर फोर्स चीफ जनरल डेविड ऑल्विन ने निर्धारित समय से पहले ही सेवानिवृत्ति ले ली है।
DEI नीतियों और वैचारिक मतभेद की भूमिका
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन बदलावों के पीछे एक मुख्य कारण सेना में लागू 'विविधता, समानता और समावेश' (DEI) नीतियों का विरोध है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक रूप से 'वोक' विचारधारा की आलोचना की है और सेना में वैचारिक शुद्धता पर जोर दिया है। DEI पहल का उद्देश्य सेना में विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों की भागीदारी बढ़ाना और भेदभाव को रोकना था। हालांकि, वर्तमान प्रशासन का तर्क है कि सेना का ध्यान केवल युद्ध की तैयारी और दक्षता पर होना चाहिए। हेगसेथ के अनुसार, नेतृत्व के पदों पर केवल उन्हीं व्यक्तियों को होना चाहिए जो राष्ट्रपति के दृष्टिकोण और नई रक्षा नीतियों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हों।
राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इन निरंतर बदलावों पर विपक्षी दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। सीनेटर मार्क वार्नर सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व में बार-बार होने वाले बदलावों से राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र अस्थिर हो सकता है और विशेषज्ञों के अनुसार, खुफिया और सैन्य एजेंसियों में निरंतरता की कमी से विदेशी खतरों के प्रति देश की प्रतिक्रिया धीमी पड़ सकती है। वहीं, व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति के पास अपनी टीम चुनने का संवैधानिक अधिकार है और प्रशासन का मानना है कि पिछले कार्यकाल के अनुभवों के आधार पर, वे इस बार केवल उन अधिकारियों को नियुक्त करना चाहते हैं जो उनके एजेंडे को बिना किसी बाधा के लागू कर सकें।
सुरक्षा तंत्र के पुनर्गठन की भविष्य की दिशा
सैन्य और खुफिया ढांचे में हो रहे ये बदलाव केवल व्यक्तियों को हटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे सुरक्षा तंत्र को पुनर्गठित करने की एक व्यापक योजना का हिस्सा प्रतीत होते हैं। डिफेंस इनोवेशन यूनिट के प्रमुख डग बेक का इस्तीफा और नेवल स्पेशल वॉरफेयर कमांड के प्रमुख जेमी सैंड्स की विदाई यह दर्शाती है कि तकनीकी और विशेष अभियानों के क्षेत्रों में भी नए नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है। नाटो (NATO) से जुड़े अधिकारी शोशाना चैटफील्ड को हटाना यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधनों के प्रति भी प्रशासन का रुख बदल सकता है। आने वाले महीनों में कई और वरिष्ठ अधिकारियों के पदों पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है, जिससे अमेरिकी सुरक्षा नीति में एक बड़े बदलाव की नींव रखी जा रही है।
