डोनाल्ड ट्रंप का दावा: भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाकर बचाईं 2.5 करोड़ जानें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर युद्ध रुकवाया। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिससे संभावित युद्ध टल गया और लगभग 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दक्षिण एशिया के दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों, भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया है। 'बोर्ड ऑफ पीस' कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके हस्तक्षेप के कारण दोनों देशों के बीच एक बड़ा युद्ध टल गया। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी, जिसके बाद तनावपूर्ण स्थिति में सुधार हुआ। 5 करोड़) लोगों की जान बचाई जा सकी।

आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ की चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यक्रम में विस्तार से बताया कि उन्होंने किस प्रकार आर्थिक दबाव का उपयोग किया। उनके अनुसार, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव चरम पर था, तब उन्होंने दोनों देशों के नेतृत्व को स्पष्ट चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगाने और सभी मौजूदा व्यापारिक समझौतों को रद्द करने की धमकी दी थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने दोनों पक्षों से कहा कि यदि वे युद्ध का रास्ता चुनते हैं, तो उन्हें अमेरिका के साथ व्यापार करने का अवसर खोना पड़ेगा। राष्ट्रपति ने दावा किया कि आर्थिक नुकसान के डर से दोनों देश बातचीत की मेज पर आने के लिए सहमत हुए।

प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी नेतृत्व से संवाद

अपने संबोधन में ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं और उनसे फोन पर सीधी बात की थी। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तानी नेतृत्व से भी संपर्क साधा था। राष्ट्रपति ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने स्वीकार किया था कि ट्रंप के हस्तक्षेप ने एक विनाशकारी युद्ध को रोक दिया और ट्रंप ने कहा कि जब दोनों देशों को लगा कि वे बहुत सारा पैसा और व्यापारिक लाभ खो सकते हैं, तो उन्होंने युद्ध न करने का निर्णय लिया।

हवाई संघर्ष और सैन्य नुकसान का विवरण

ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान उस समय की सैन्य स्थिति का भी वर्णन किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान स्थिति इतनी गंभीर थी कि दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध शुरू हो चुका था। राष्ट्रपति के अनुसार, उस संघर्ष में कुल 11 जेट गिराए गए थे। उन्होंने इन विमानों को 'बहुत महंगे जेट' बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थे। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये दावे किस विशिष्ट सैन्य घटना से संबंधित हैं, लेकिन उनका इशारा संभवतः 2019 के बालाकोट हवाई हमले के बाद हुए घटनाक्रम की ओर था।

बोर्ड ऑफ पीस और संयुक्त राष्ट्र को वित्तीय सहायता

शांति प्रयासों पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने एक बड़ी वित्तीय घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका 'बोर्ड ऑफ पीस' को $10 billion का योगदान देने जा रहा है। राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की और कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ बहुत करीब से काम करेंगे। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन संयुक्त राष्ट्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दुनिया में चल रहे कई युद्धों के बारे में उन्होंने अभी तक पर्याप्त चर्चा नहीं की है, लेकिन भविष्य में वे इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार की योजना

राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए और उन्होंने कहा कि 'बोर्ड ऑफ पीस' संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों पर नजर रखेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संस्था सही ढंग से कार्य कर रही है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वित्तीय मदद और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि अंतरराष्ट्रीय निकाय के पास पर्याप्त संसाधन हों ताकि वह वैश्विक शांति बनाए रखने में प्रभावी भूमिका निभा सके। ट्रंप ने दोहराया कि एक मजबूत संयुक्त राष्ट्र वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

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