फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के साथ रक्षा संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। इंडिया AI समिट के दौरान मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि राफेल लड़ाकू विमानों का भविष्य में उत्पादन अब 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत संयुक्त रूप से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश राफेल जेट कार्यक्रम को न केवल जारी रखना चाहते हैं, बल्कि इसे भारतीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ गहराई से जोड़ना चाहते हैं। मैक्रों के अनुसार, यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और भविष्य के सभी ऑर्डरों के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगा।
114 नए विमानों का ऑर्डर और औद्योगिक ढांचा
राष्ट्रपति मैक्रों ने पुष्टि की कि भारत सरकार ने हाल ही में 114 नए राफेल विमानों के एक बड़े बैच के लिए अपनी रुचि व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस नए ऑर्डर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका स्थानीय उत्पादन होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूर्ण औद्योगिक सहयोग शामिल है। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि 'मेक इन इंडिया' इस नए सौदे का मुख्य हिस्सा होगा, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को उन्नत एयरोस्पेस तकनीक तक पहुंच प्राप्त होगी। यह पहल भारत की मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MRFA) की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
पनडुब्बी और एयरोस्पेस क्षेत्र में सहयोग का विस्तार
रक्षा सहयोग के दायरे को बढ़ाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि राफेल के सफल मॉडल को अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पनडुब्बियों और व्यापक एयरोस्पेस क्षेत्र का उल्लेख किया। मैक्रों के अनुसार, फ्रांस भारत के साथ रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां केवल उपकरणों की बिक्री के बजाय संयुक्त विकास और उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और इसमें उन्नत नौसैनिक प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण और भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर निर्माण की योजनाएं शामिल हैं।
स्थानीयकरण और भारतीय घटकों पर विशेष जोर
फ्रांस ने भारत में अधिक से अधिक स्थानीय सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि राफेल कार्यक्रम के तहत फ्रांस का दृष्टिकोण यह है कि विमानों में अधिक से अधिक भारतीय घटक (components) शामिल हों। उन्होंने आश्वासन दिया कि महत्वपूर्ण उपकरणों और डिवाइसों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस रणनीति का उद्देश्य एक मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि भारत के रक्षा निर्यात को भी बल मिलेगा और मैक्रों ने भारतीय तकनीकी कौशल पर भरोसा जताते हुए इसे एक साझा भविष्य की साझेदारी बताया।
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का वैश्विक महत्व
मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच के संबंधों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी सामान्य रक्षा खरीद-बिक्री के संबंधों से कहीं अधिक गहरी है। दोनों देशों के बीच यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साझा लक्ष्यों पर आधारित है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि फ्रांस भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक भागीदार मानता है। इस साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और विकास (R&D) और जटिल रक्षा प्रणालियों के सह-उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है, जो दोनों देशों के संप्रभु हितों की रक्षा करने में सहायक होगा।
